ट्रम्प ने कहा अमेरिका 3 नवंबर से पहले ईरान पर सैन्य आक्रमण नहीं करेगा

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 को कहा कि वे 3 नवंबर को होने वाले मिडटर्म चुनाव से पहले ईरान पर सैन्य हमलों को फिर से शुरू नहीं करने देंगे। ट्रम्प ने यह बयान ईरान के साथ अमेरिकी संघर्ष को लेकर महत्वपूर्ण स्थिति में दिया।
युद्ध की संभावित समाप्ति पर ट्रम्प की राय
ट्रम्प ने रिपब्लिकन उम्मीदवारों के समर्थन में कहा कि वे आश्वस्त हैं कि चुनाव के आस-पास यह युद्ध समाप्त हो सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका फिर से ईरान पर बड़े स्तर पर सैन्य कार्रवाई कर सकता है। उन्होंने साफ किया कि फिलहाल चुनाव से पहले कोई सैन्य हमले नहीं होंगे।
कई हफ्तों से ट्रम्प लगातार यह धमकी दे रहे थे कि मिडटर्म चुनाव के बाद यह युद्ध तेज हो सकता है। उन्होंने शुरू में अमेरिकी जनता को यह बताया था कि यह सैन्य अभियान कुछ ही हफ्तों में खत्म हो जाएगा, लेकिन अब स्थिति गंभीर बनी हुई है।
ईरान के साथ वार्ता और संघर्ष की स्थिति
ट्रम्प की टीम ईरान के साथ “उत्पादक वार्ता” कर रही है। जून में दोनों देशों ने एक अस्थायी समझौता किया था जिसमें 60 दिन का युद्धविराम और दीर्घकालीन शांति की रूपरेखा बनाई गई थी। लेकिन यह समझौता कुछ ही सप्ताह में टूट गया।
समझौते के टूटने के बाद, होर्मुज जलसंधि के नियंत्रण पर विवाद और सैन्य कार्रवाई तेज हो गई। इसका कारण होर्मुज जलसंधि को लेकर दोनों पक्षों की अकेली पकड़ रही रणनीतिक स्थिति है, जहां विश्व का लगभग पाँचवां हिस्सा तेल का परिवहन होता है।
अक्टूबर के अंत तक अमेरिका ने अतिरिक्त सैनिक तैनात करने की योजना बनाई है। USS थिओडोर रूजवेल्ट विमान वाहक युद्धपोत क्षेत्र में पहुंच सकता है। यह आवश्यकता इसलिए महसूस हो रही है क्योंकि युद्ध छह महीनों से चल रहा है, और हाल ही में ईरान ने जलसंधि में टैंकरों पर हमले तेज कर दिए हैं।
यह भी बताया गया कि यूएस नेवी अमेरिका समर्थित देशों के तेल निर्यात को सुचारु रख रही है जबकि ईरान के तेल निर्यात को काफी बाधित कर दिया है। इससे अमेरिका को रणनीतिक लाभ मिला है।
हालांकि, युद्ध और तनाव के बीच टैंकर ऑपरेटर जोखिम लेने को तैयार हैं, परंतु वे एक दिन के लिए लाखों डॉलर चार्ज कर रहे हैं। इस बीच सऊदी अरब और यमन संघर्ष में भी इसका असर दिखाई देता है, जहां ईरान समर्थित हूथी विद्रोहियों और सऊदी सरकार के बीच संघर्ष जारी है।




