हिंदी नाडु में युवा समर्थन से TVK की विजय, CJP ने GenZ मुद्दे पर किया हमला

चेन्नई में, तमिलगा वेत्त्री काज़गम (TVK) की विधानसभा चुनाव में जीत के बाद से कॉकroach जनता पार्टी (CJP) ने उनकी कल्याण एवं प्रशासनिक नीतियों पर कड़ी आलोचना शुरू कर दी है। इस संघर्ष में दोनों पार्टियां खासकर युवा वर्ग, विशेषकर Gen Z से समर्थन लेने की कोशिश कर रही हैं।
अभिजीत दीपके का CJP के आरोप
8 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु में “People’s Tribunal” में दिए गए भाषण में CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने TVK की जीत पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि विशेष सघन संशोधन (SIR) का इस्तेमाल केरल के पिनाराई विजयन और तमिलनाडु के MK स्टालिन सरकारों को गिराने के लिए किया गया। दीपके ने कहा कि विजय को सीएम पद वोट चोरी या मतधोखाधड़ी की वजह से मिला, जिस कारण DMK और स्टालिन चुनाव हार गए।
हालांकि CJP राजनीतिक पार्टी नहीं है, लेकिन उसने DMK के विरोध में समान राजनीतिक आधार साझा किया है। यह स्थिति CJP को हिंदी नाडु में अपनी स्वतंत्र पहचान बनाने का मौका दे रही है।
युवा मुद्दों और विरोध की राजनीति
CJP के दक्षिण भारत नेतृत्व ने युवा हितों जैसे रोजगार गारंटी, शिक्षा सुधार और सरकारी योजनाओं की प्रभावशीलता पर सवाल उठाए हैं। इसने मुफ्त या सब्सिडी वाली LPG सिलेंडर, नवजात के लिए सोने की अंगूठी योजना और कर्ज़ राहत जैसी योजनाओं को सिर्फ नामांतरण या अधूरा बताया है।
CJP ने X पर तमिलनाडु सरकार की पहलों को उपरी और जनांदोलन को रोकने वाली कार्रवाई करार दिया। इसमें अगस्त में कॉलेज शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी एक निर्देश भी शामिल था, जिसमें छात्रों को लेफ्ट पार्टी और CJP के विरोधों में भाग लेने से मना किया गया, लेकिन यह बाद में वापिस ले लिया गया।
CJP का तर्क है कि युवाओं को राजनीति में स्वयं को अभिव्यक्त करने से नहीं रोकना चाहिए, खासकर जब सरकार खुद Gen Z की उम्मीदों पर बनी हो। उनकी राजनैतिक लड़ाई अब बेरोजगारी, NEET परीक्षा की पारदर्शिता और संस्थागत जवाबदेही पर केंद्रित है।
TVK ने राष्ट्रीय स्तर पर विजय के स्टार पावर और पार्टी नेताओं के प्रधानमंत्री पद के प्रस्ताव के साथ ध्यान आकर्षित किया है। कहते हैं कि उनके 60-65% समर्थक 30 वर्ष से कम उम्र के युवा हैं और उन्होंने युवा असंतोष का तोड़ कर चुनाव में जीत हासिल की। पार्टी की IT शाखा प्रशासनिक कदमों तथा योजनाओं की शुरुआत को गंभीरता की निशानी मानती है।
राजनीतिक विश्लेषक सुनील कुमार के अनुसार, तमिलनाडु की राजनीति क्षेत्रीय मुद्दों पर केंद्रित है, जिसमें युवा मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि CJP जैसी छात्र आत्मीय राजनीति यहां आगे लोकप्रिय हो सकती है।
वहीं, CJP के आलोचना के बावजूद TVK ने टिप्पणी नहीं की है। जानकार अरुण कुमार के अनुसार, CJP को DMK की छाया से बाहर निकलना होगा ताकि वह हिंदी नाडु में स्वतंत्र समर्थन जुटा सके। TVK की मौन नीति के चलते CJP को राजनीतिक गति मिल रही है, लेकिन DMK के साथ निकटता एक अवरोध है।




