उत्तर कोरिया ने पनडुब्बी से दागे जाने वाले क्रूज़ मिसाइल का परीक्षण किया

उत्तर कोरिया ने अपनी सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने के मकसद से पनडुब्बी से दागने वाली क्रूज़ मिसाइलों का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है। यह परीक्षण पूर्वी जल क्षेत्रों में बुधवार को किया गया, जिससे देश की रणनीतिक ताकतें और बढ़ी हैं। यह कदम अमेरिका और सियोल के साथ कूटनीतिक ठहराव के बीच आया है।
परीक्षण और उद्देश्यों का विवरण
उत्तर कोरियाई राज्य मीडिया के अनुसार, दो प्रकार की क्रूज़ मिसाइलों का परीक्षण 14 अक्तूबर को किया गया। रिपोर्ट में इन मिसाइलों को रणनीतिक बताया गया है, जो संभवतः परमाणु वारहेड के साथ लैस हो सकती हैं। हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया गया कि मिसाइलें किसी पनडुब्बी से दागी गईं या किसी जलमग्न परीक्षण मंच से।
ऐसे परीक्षणों का उद्देश्य जल के नीचे लड़ाकू सिस्टम की तत्परता का आकलन करना, नौसेना की रणनीतिक अभियानों की क्षमता बढ़ाना और परमाणु निवारक क्षमता की विश्वसनीयता दिखाना बताया गया है।
क्षेत्रीय और राजनयिक प्रभाव
दक्षिण कोरिया की सेना ने इस परीक्षण पर तुरंत कोई टिप्पणी नहीं की। इसके पहले उत्तर कोरिया ने हाइपरसोनिक मिसाइल प्रणालियों का भी परीक्षण किया था, जो दक्षिण कोरिया और जापान की मिसाइल सुरक्षा प्रणालियों को मात देने की कोशिशों में एक अहम कदम है।
अक्टूबर और सितंबर में हुई मिसाइल परीक्षाओं ने संकेत दिया है कि उत्तर कोरिया अपने हथियारों के भंडार को तेजी से बढ़ा रहा है। इसके अलावा, देश ने लाइव-फायर अभ्यास किए और एक नया युद्धपोत भी सेना में शामिल किया है।
लीडर किम जोंग उन ने अमेरिका और दक्षिण कोरिया के साथ बातचीत के कई प्रस्ताव ठुकरा दिए हैं और परमाणु हथियार कार्यक्रम को सार्वजनिक रूप से बढ़ावा दे रहे हैं।
पिछले वर्षों में किम ने संवाद और सहयोग को पूरी तरह से बंद कर दिया है और दक्षिण कोरिया को स्थायी दुश्मन बताया है। वाशिंगटन के साथ साल भर से कूटनीतिक गतिरोध जारी है, जिससे क्षेत्रीय तनाव बढ़ा है।
किम जोंग उन ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के वार्ता शुरू करने के प्रस्ताव को अस्वीकार किया है। उनका कहना है कि अमेरिका को अपनी “शत्रुतापूर्ण” नीति छोड़नी चाहिए और उत्तर कोरिया से परमाणु विखंडन की मांग को वार्ता की शर्त नहीं बनाना चाहिए।




