तेलंगाना के सीएम ने पानी-बिजली बचाने के लिए एक फसल चक्र स्थगित करने की अपील की

तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने किसानों से एक फसल चक्र, खासकर जल-गहन यासंगी (रबी) धान की खेती को स्थगित करने का आग्रह किया है। यह ऐल Niño नामक दुर्लभ जलवायु घटना के कारण लिया गया कदम है जिसका उद्देश्य राज्य में पीने के पानी और बिजली की बचत करना है। इस अपील के बाद किसानों में नाराजगी और विरोध की लहर फैल गई है।
जल संकट और सरकार की अपील
मुख्यमंत्री ने हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि राज्य के जलाशयों में जल स्तर काफी घटकर केवल 200 टीएमसी रह गया है, जो सामान्य स्तर 462 टीएमसी से बहुत कम है। इस वजह से पीने के पानी को प्राथमिकता देते हुए कृषि जल उपयोग को सीमित करना जरूरी हो गया है। उन्होंने सभी किसानों से आग्रह किया कि एक फसल चक्र को स्थगित कर पानी बचाने में सहयोग दें।
रेवंत रेड्डी ने कहा कि कोविड महामारी की तरह अब भी पानी और बिजली बचाने का एक मंत्र अपनाना होगा जब तक कि जुलाई 2027 में दोबारा बारिश न हो। उन्होंने किसानों से कहा “आपने हमें हर वक्त भोजन दिया है, अब हमें पानी भी दें।” राज्य में बिजली और जल संकट के चलते यह कदम जरूरी हो गया है।
किसानों की प्रतिक्रिया और राजनीतिक विवाद
इस घोषणा के बाद किसानों में भारी आक्रोश फैल गया है। खम्मम से लेकर आदिलाबाद तक किसानों ने विरोध प्रदर्शन किया, कुछ ने फसलें जलाईं और मुख्यमंत्री के पुतले भी जला डाले। कई किसान संगठन और वामपंथी पार्टियां सरकार की आलोचना कर रही हैं कि यह कदम किसानों पर एक तरह का बोझ डाल रहा है।
समेकित किसान मोर्चा के जिला प्रतिनिधि सहित अनेक किसानों ने कहा कि यह घोषणा उनकी आर्थिक सुरक्षा पर चोट पहुँचाती है। वे सरकार से समर्थन और मुआवजे की मांग कर रहे हैं, खासकर वे किसान जो रबी की फसल के लिए पहले से तैयार हैं। कांग्रेस भी विरोधियों के हमलों में आई क्योंकि वे पूर्ववर्ती चुनावी वादों को पूरा नहीं कर पाने का आरोप लगा रहे हैं।
मुख्यमंत्री के साथ उप-मुख्यमंत्री मल्लू भाट्टी विक्रमार्का और राजस्व मंत्री पोंगुलेती श्रीनिवास रेड्डी ने भी जल उपलब्धता की खराब स्थिति को स्पष्ट किया। कृष्णा जलाशयों में 72% और गोदावरी जलाशयों में 42% जल कम होने का आंकड़ा बताया गया। इसी आधार पर किसानों से फसल स्थगन का अनुरोध किया गया है।
कृषि विशेषज्ञों और विपक्ष का कहना है कि राज्य सरकार की योजना और प्रबंधन में खामी के कारण यह स्थिति पैदा हुई है। भाजपा के किसान मोर्चा अध्यक्ष कोंडपल्ली श्रीधर रेड्डी ने कहा कि इस संकट के लिए प्रशासन पूरी तरह से तैयार नहीं था और राज्य ने बिजली और जल संसाधनों के लिए उचित व्यवस्था नहीं की।
सरकार ने कहा है कि प्रभावित कृषि मजदूरों को वीबी-जी राम-जी योजना के तहत मुआवजा दिया जाएगा, लेकिन इस योजना की विस्तृत रूपरेखा अभी स्पष्ट नहीं हुई है। वहीं, कांग्रेस के किसान नेताओं ने आश्वासन दिया है कि सरकार जल्द अन्य लाभों की घोषणा करेगी और केंद्र से भी सहायता मांगी जाएगी।
तेलंगाना में इन सब के बीच शीतकालीन मौसम शुरू हो चुका है और बिजली की मांग भी बढ़ रही है। उप मुख्यमंत्री ने यह स्वीकार किया कि इस बार बिजली की खपत अक्टूबर में 20,000 मेगावाट से ऊपर पहुंच गई है, जो पिछले वर्षों से ज्यादा है। राजनीतिक दबाव के बीच सबसे बड़ी चुनौती अब राज्य के किसान एवं बिजली संकट से निपटना है।




