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वाशिंगटन, अमेरिका: ट्रंप जूनियर ने ईरान युद्ध का किया था विरोध, मध्य पूर्व के संघर्षों से दूर रहने की दी थी सलाह

वाशिंगटन, अमेरिका। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के बड़े बेटे डोनल्ड ट्रंप जूनियर ने ईरान के खिलाफ युद्ध का निजी तौर पर विरोध किया था। एक रिपोर्ट के अनुसार, उनका मानना था कि अमेरिका को मध्य पूर्व में एक और सैन्य संघर्ष में शामिल होने से बचना चाहिए। उन्होंने इस मुद्दे पर अपने पिता के सामने भी अपनी राय रखी थी।

द अटलांटिक की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप जूनियर ने ईरान के खिलाफ युद्ध को लेकर अपनी असहमति अपने पिता को स्पष्ट रूप से बताई थी। रिपोर्ट में दो ऐसे लोगों के हवाले से यह जानकारी दी गई है, जिन्होंने ट्रंप जूनियर से सीधे बातचीत की थी।

विदेशी सैन्य हस्तक्षेप को लेकर संदेह

रिपोर्ट के अनुसार, डोनल्ड ट्रंप जूनियर लंबे समय से विदेशों में अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप को लेकर संदेह जताते रहे हैं। उनका विचार था कि अमेरिका को मध्य पूर्व में एक और संघर्ष में उलझने से बचना चाहिए। ईरान के खिलाफ युद्ध को लेकर उनका निजी विरोध इसी सोच से जुड़ा बताया गया है।

मध्य पूर्व में सैन्य कार्रवाई को लेकर अमेरिका की भूमिका लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय रही है। ऐसे में राष्ट्रपति के परिवार के भीतर युद्ध को लेकर अलग-अलग विचारों की खबर भी राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

सार्वजनिक रूप से नहीं जताया मतभेद

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ट्रंप जूनियर ने ईरान के मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से अपने पिता के साथ कोई मतभेद नहीं जताया। हालांकि, निजी बातचीत में उन्होंने युद्ध का विरोध किया था।

इस रिपोर्ट से यह संकेत मिलता है कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को लेकर ट्रंप जूनियर की निजी राय उनके पिता की राष्ट्रपति के रूप में अपनाई गई नीति से अलग हो सकती थी। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में इस मुद्दे पर दोनों के बीच हुई बातचीत का विस्तृत विवरण सामने नहीं आया है।

मध्य पूर्व में नए संघर्ष से बचने की राय

द अटलांटिक की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप जूनियर की प्राथमिकता अमेरिका को मध्य पूर्व के एक और संघर्ष से दूर रखना थी। उन्होंने इस विषय पर अपनी राय निजी तौर पर रखी, जबकि सार्वजनिक मंच पर राष्ट्रपति से किसी मतभेद की घोषणा नहीं की।

रिपोर्ट में यह जानकारी सामने नहीं आई है कि राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने अपने बेटे की आपत्ति पर क्या प्रतिक्रिया दी थी या उनकी निजी राय का ईरान संबंधी फैसलों पर कोई प्रभाव पड़ा था या नहीं।

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