केरल में निजी स्वास्थ्य सेवा को सस्ते में उपलब्ध करवाना चुनौतीपूर्ण

केरल सरकार ने निजी स्वास्थ्य सेवा को अधिक किफायती बनाने के लिए निजी स्वास्थ्य क्षेत्र से परामर्श और एक नए विधेयक की घोषणा की है। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब राज्य में पिछले सात वर्षों से चल रही कानूनी लड़ाई के बाद केरल उच्च न्यायालय ने केरल क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट्स (रजिस्ट्रेशन और रेगुलेशन) अधिनियम 2018 को मान्यता दी है।
केरल क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट अधिनियम का महत्व
यह अधिनियम राज्य में पहली बार पूरे स्वास्थ्य क्षेत्र, जिसमें सार्वजनिक और निजी दोनों शामिल हैं, को एक नियामक ढांचे में लाने का प्रयास था। हालांकि, निजी स्वास्थ्य क्षेत्र ने इस अधिनियम का विरोध किया और इसके क्रियान्वयन में बाधाएं उत्पन्न कीं। नवंबर में उच्च न्यायालय ने निजी अस्पताल संघ और भारतीय मेडिकल एसोसिएशन की आपत्तियों को खारिज कर अधिनियम की वैधता को बरकरार रखा।
केरल के अधिनियम ने निजी स्वास्थ्य सेवाओं द्वारा लिए जाने वाले उपचार या निदान की कीमतों को सीमित करने के बजाय, सभी चिकित्सा संस्थानों को पंजीकरण के साथ न्यूनतम मानकों का पालन करना अनिवार्य किया है। इसमें अस्पतालों को अपनी सेवा शुल्क सूची भी सार्वजनिक करनी होती है ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
न्यायालय में जारी विवाद और पंजीकरण की स्थिति
निजी स्वास्थ्य क्षेत्र का तर्क है कि इस अधिनियम में संविधान के अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 19 (1)(ग) का उल्लंघन होता है। उच्च न्यायालय ने अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों को संवैधानिक मानते हुए सरकार को इसे लागू करने के निर्देश दिए। इसके बाद निजी अस्पतालों ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की है, जहां अब तक अधिनियम पर रोक नहीं लगी है, लेकिन कुछ अंतरिम सुरक्षा मिली है।
केरल क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट काउंसिल पंजीकरण प्रक्रिया जारी रखे हुए है, लेकिन अभी भी कई चिकित्सा संस्थान अपना पंजीकरण नहीं करवा पाए हैं। छोटे अस्पतालों के लिए जांच के मानदंड कुछ सरल किए गए हैं, ताकि वे भी नियामक दायरे में आएं।
सरकार एक नए विधेयक पर काम कर रही है, जिसका उद्देश्य मरीजों के हितों की रक्षा करते हुए निजी अस्पतालों की व्यावसायिक चुनौतियों को समायोजित करना है। हालांकि, निजी स्वास्थ्य क्षेत्र अभी भी केरल क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट अधिनियम के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में लड़ाई जारी रखे हुए है।
स्वास्थ्य अधिकार कार्यकर्ता बी. एकबाल ने कहा है कि निजी क्षेत्र की चिकित्सा खर्चों को नियंत्रित करने का यह प्रयास सकारात्मक है। उन्होंने बताया कि निजी अस्पताल महत्वपूर्ण हैं, लेकिन स्वास्थ्य सेवा को पूरी तरह बाजार की ताकतों पर छोड़ना उचित नहीं। सरकार को मरीजों के संरक्षण के लिए उचित नियमन करना चाहिए।
डॉ. एकबाल ने कहा कि सरकार को मानक उपचार दिशानिर्देशों (STGs) को लागू करना चाहिए और चिकित्सा व जांच प्रक्रियाओं के लिए वैज्ञानिक लागत मूल्यांकन शुरू कर एक पारदर्शी और उचित शुल्क प्रणाली विकसित करनी चाहिए। इससे केरल जैसे राज्य की जरूरतों के अनुसार संतुलित शुल्क निर्धारित हो सकेगा।
यह पहल केरल में निजी स्वास्थ्य सेवा को अधिक पारदर्शी और नियमित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, हालांकि अभी भी बड़ी चुनौतियाँ बनी हुई हैं। मरीजों का हित ध्यान में रखते हुए निजी स्वास्थ्य सेवा को किफायती बनाना सरकार के लिए प्राथमिकता बनी रहेगी।




