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तेजस्वी यादव ने पटना में INDIA ब्लॉक की अगुवाई में प्रदर्शन किया, पुलिस ने लोक भवन ले जाया

पटना में INDIA ब्लॉक के नेताओं ने सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विशेष तीव्र_revision (SIR) कार्य में खामियों के आरोप लगाते हुए एक प्रदर्शन किया। इस विरोध मार्च का नेतृत्व राजद के तेजस्वी यादव ने किया, जो विधानसभा के सामने शहीद स्मारक से शुरू होकर लोक भवन की ओर बढ़ा। पुलिस ने मुख्य निर्वाचन कार्यालय के पास विरोधकारियों को रोक दिया।

प्रदर्शन का उद्देश्य और पुलिस कार्रवाई

पुलिस ने बताया कि जब प्रदर्शनकारी सुरक्षा बाधाओं को पार करने का प्रयास कर रहे थे, तब उन्हें नियंत्रण में लेकर एक वाहन में बैठाकर लोक भवन ले जाया गया। इस दौरान पूर्व सीपीआई(एमएल) लिबरेशन विधायक अजीत कुशवाहा कार्यक्रम के दौरान बेहोश हो गए। यह आंदोलन “आक्रोश मार्च” के नाम से जाना गया, जिसका मुख्य केंद्र क्षेत्रीय निर्वाचन अधिकारी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग थी।

तेजस्वी यादव ने पुलिस वाहन में ले जाते समय संवाददाताओं को बताया कि उन्हें राज्यपाल से मिलने की अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि एनडीए नेता लोकतंत्र को नुकसान पहुंचा रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान राजद के कई विधायक पुलिस वाहन पर चढ़ गए, जिसमें यादव को ले जाया जा रहा था।

नेताओं के बयान और आगे का कार्यक्रम

पटना के एसएसपी कार्तिकेय शर्मा ने पत्रकारों से कहा कि तेजस्वी यादव को हिरासत में नहीं लिया गया है, बल्कि उन्हें और अन्य नेताओं को लोक भवन ले जाया गया है। वहीं, कुछ अन्य INDIA ब्लॉक के नेता मौके से हिरासत में लिए गए।

यादव ने कहा कि ज्ञानेश कुमार की रक्षा के लिए हर जगह बैरिकेड लगाए गए हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि जो भी वोट चोर हैं, उन्हें जनता की सजा जरूर मिलेगी। उन्होंने प्रशासन पर आरोप लगाया कि वे डर के मारे कमजोर हैं क्योंकि सत्ता में बैठे लोग फर्जी वोटों के सहारे आए हैं।

प्रदर्शन ने बिहार में चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजद के इस आंदोलन का मकसद मतदाता सूची के सही और निष्पक्ष संशोधन को सुनिश्चित कराना था।

यह प्रदर्शन राज्य की राजनीतिक स्थिति को दर्शाता है, जहाँ विपक्ष नियमित रूप से चुनाव आयोग और सत्ता पक्ष की कड़ी आलोचना करता रहा है। आगे की स्थिति पर नजर बनी हुई है कि प्रशासन और विपक्ष के बीच किस तरह से संवाद स्थापित होता है।

इस आंदोलन से स्पष्ट है कि राजनीतिक दल मतदान प्रक्रिया में सुधार की मांग को लेकर राज्यों में सक्रिय हैं और वे लोकतंत्र की रक्षा को प्राथमिकता देते हैं। भविष्य में भी ऐसी गतिविधियाँ बढ़ सकती हैं यदि मतदाता सूची में पारदर्शिता की गारंटी नहीं मिलती।

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