बिहार सीएम सम्राट चौधरी की मुफ्त बिजली छूट बंद किए जाने की अपील पर विवाद

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 2 नवंबर को सभी सक्षम और करदाता उपभोक्ताओं से राज्य के विकास के लिए 125 यूनिट मुफ्त बिजली के लाभ को त्यागने की अपील की। इस अपील के बाद यह संभावना जताई जा रही है कि आने वाले समय में बिहार में मुफ्त बिजली योजना खत्म की जा सकती है।
बिहार में मुफ्त बिजली योजना की वर्तमान स्थिति
बिहार विधानसभा चुनाव से पहले 17 जुलाई, 2025 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य के प्रत्येक घरेलू उपभोक्ता को 125 यूनिट मुफ्त बिजली देने की घोषणा की थी। वर्तमान में राज्य सरकार इस योजना पर प्रति परिवार सालाना 8,000 से 10,000 रुपये तक खर्च करती है, जो कुल 23,000 करोड़ रुपये के बिजली सब्सिडी व्यय का रूप ले चुका है। इस योजना के तहत लगभग 1.92 करोड़ घरेलू उपभोक्ताओं को यह सुविधा दी जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश की तुलना में बिहार में आबादी आधी होने के बावजूद उत्तर प्रदेश का बिजली सब्सिडी व्यय मात्र 6,000 करोड़ रुपये है। इस आधार पर उन्होंने सक्षम नागरिकों और करदाताओं से मुफ्त बिजली सुविधा छोड़ने की अपील की है ताकि बचाई गई राशि बिहार के विकास में लगाई जा सके।
सरकार की अन्य योजनाएं और विपक्ष की प्रतिक्रिया
सम्राट चौधरी ने बताया कि मुफ्त बिजली योजना के अलावा राज्य सरकार महिला रोजगार योजना के तहत 1.81 करोड़ महिलाओं के बैंक खातों में फरवरी 2026 तक 10,000 रुपये तक की राशि भेज चुकी है। इसके अलावा, छात्र क्रेडिट कार्ड योजना के तहत उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों को सालाना 18,000 करोड़ रुपये तक का वित्तीय सहयोग दिया जाता है।
वहीं, विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने सरकार पर वित्तीय संकट की गंभीर स्थिति के आरोप लगाते हुए कहा है कि राज्य खजाना कर्मचारी वेतन, छात्रवृत्ति, पेंशन और किसानों के भुगतान के लिए भी धन की कमी से जूझ रहा है। उन्होंने भ्रष्टाचार और राजस्व हानि को भी मुख्य कारण बताया।
पटना के बोरिंग कैनाल रोड के निवासी सुमितेश कुमार ने कहा कि कर भुगतान करने वाली मध्यम वर्ग की आबादी को मुफ्त बिजली से वंचित क्यों किया जाए, सरकार को पहले अपने मंत्रियों और विधायकों से निजी सुविधाएं वापस लेने का आह्वान करना चाहिए। वहीं, नलीन कुमार ने चिंता जताई कि भविष्य में सरकार बिजली की कीमतें बढ़ा सकती है या मुफ्त यूनिटों में कटौती कर सकती है।
ऊर्जा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 2005 में प्रति व्यक्ति बिजली खपत 75 यूनिट थी जो 2026 में बढ़कर 401 यूनिट हो गई है। इस बीच, राज्य सरकार ने सोलर ऊर्जा के बढ़ते उपयोग के लिए छतों पर सोलर पैनल लगाने और सोलराइजेशन को बढ़ावा देने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं।
देश के कई अन्य राज्यों में भी वित्तीय संकट के कारण मुफ्त योजनाओं में कटौती हो रही है। महाराष्ट्र और हिमाचल प्रदेश की सरकारों ने भी इसी तरह के जनकल्याणकारी लाभ सीमित किए हैं।
उन्होंने कहा कि बिहार में मुफ्त बिजली योजना को खत्म करने या सीमित करने की योजना क्यों महत्वपूर्ण है, इसका कारण विकास और वित्तीय स्थिरता है। अब यह देखना होगा कि सरकार की अपील पर कितने लोग इस सुविधा को छोड़ते हैं और इससे राज्य की वित्तीय स्थिति कैसे प्रभावित होती है।
मुख्य तथ्य
- बिहार सरकार 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली देती है।
- राज्य सरकार सालाना लगभग ₹23,000 करोड़ बिजली सब्सिडी पर खर्च करती है।
- मुख्यमंत्री ने करदाता और सक्षम नागरिकों से मुफ्त योजना छोड़ने की अपील की।
- विपक्ष ने वित्तीय संकट और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं।




