ब्लैक सी में ड्रोन हमले से बढ़ी रूस की सैन्य तनागी, NATO की प्रतिक्रिया पर नजर

ब्लैक सी में इस माह सात से अधिक मालवाहक जहाजों पर ड्रोन हमलों की श्रृंखला ने NATO सदस्यों रोमानिया और बुल्गारिया के समुद्री क्षेत्र में तनाव बढ़ा दिया है। इस सिलसिले में दो लोगों की मौत हो चुकी है जबकि कम से कम 25 लापता हैं। इस घटना ने वैश्विक समुद्री व्यापार मार्ग को खतरे में डाल दिया है और इसमें अन्य देशों के युद्ध में सीधे शामिल होने का जोखिम भी है।
हमलों का राजनीतिक और रणनीतिक महत्व
युद्ध के दौरान रूस ने लगातार यूक्रेन के ब्लैक सी और डेन्यूब नदी के बंदरगाहों पर बमबारी की है, जिससे किव को अपनी अनाज निर्यात के वैकल्पिक मार्गों पर निर्भर रहना पड़ा है। हाल के हमलों में, दो जहाजों में आग लगी जो रोमानिया के क्षेत्रीय जल में ड्रोन के हमले से हुई।
रोमानियन राष्ट्रपति निकुशोर दान ने ब्रुसेल्स में कहा कि दो ड्रोन जहाजों को निशाना बना चुके हैं, हालांकि उन्होंने ड्रोन का स्वामी स्पष्ट नहीं किया। उनका कहना था कि रोमानियन स्थिति पर प्रतिक्रिया होगी।
बुल्गारियाई प्रधानमंत्री रुमेन रादेव ने बताया कि ये हमला यूक्रेन की अपनी ही टीम या नावों पर संभवता नहीं हो सकता क्योंकि इसका लाभ सीधे रूस को होता है। हालांकि, इसे साबित करना मुश्किल है।
हमलों के हालिया विवरण और NATO की प्रतिक्रिया
15 अक्टूबर को सैन मरीनो के एक रासायनिक टैंकर Wine Trader को ड्रोन हमले में आग लग गई, पांच चालक दल बचाए गए जबकि सात अभी भी लापता हैं। इसके एक दिन पहले तुर्की से रोमानिया जा रहे एक तेल और रसायन टैंकर Yara J को ड्रोन ने निशाना बनाया था।
बुल्गारिया के तट से मंगलवार को दो जहाज ड्रोन हमले की चपेट में आए। यूक्रेन के Chelsea 3 जहाज के 15 सदस्य निकाले गए, जबकि HS Dignity के 11 सदस्यों का अभी कोई पता नहीं चला है।
NATO के महासचिव मार्क रुटटे ने कहा कि उनकी संगठन ने पूर्वी सीमा पर स्थिति मजबूत की है और ड्रोन हमलों को रोकने की क्षमता बढ़ाई जा रही है। NATO की सुरक्षा गारंटी वाले अनुच्छेद 5 के तहत इन आर्थिक क्षेत्रों में हमले शामिल हैं या नहीं, इस पर चर्चा जारी है।
ब्लैक सी में ड्रोन हमलों के बाद बढ़ती चुनौतियों पर बुल्गारिया ने NATO के ड्रोन् एज प्रोजेक्ट में शामिल होने की योजना बनाई है। वहीं स्थानीय कंसल्टेंट ने कहा कि अभी तक इन हमलों से वाणिज्यिक व्यापार पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ा, लेकिन बीमा लागत में वृद्धि हुई है।



