CJP नेताओं की रिहाई में देरी, चार जमानत खारिज

नई दिल्ली में CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की रिहाई में देरी हुई है। दोनों नेता 14 अक्टूबर को जन्तर मंतर के बंद गेट पार कर प्रदर्शन स्थल में घुसने के आरोप में पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे गए थे। मामले की सुनवाई 18 अक्टूबर को होनी थी, लेकिन विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) समय पर उपस्थित नहीं हुए।
जमानत आवेदन पर विवाद
सुनवाई में देरी और चार जमानत आवेदन को अस्पष्ट कारणों से खारिज किए जाने पर कार्यकर्ता रत्ना सिंह ने पुलिस प्रशासन पर आरोप लगाए हैं। उन्होंने बताया कि पुलिस ने उन लोगों को भी आपराधिक पृष्ठभूमि वाला बताया जिनपर पहले से प्राथमिकी दर्ज है, जबकि वे शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों में थे।
CJP के नेताओं ने बताया कि वे राष्ट्रीय ध्वज फहराने और नारे लगाने के लिए जन्तर मंतर पहुंचे थे। पुलिस प्रशासन ने इस क्षेत्र को अब प्रदर्शन के लिए अधिकृत नहीं किया है, इसलिए आरोप लगाए गए।
विधिक प्रक्रिया और राजनीतिक प्रतिक्रिया
रत्ना सिंह की शिकायत के अनुसार, SEM कोर्ट में न्यायिक प्रक्रिया की अनियमितताएं सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालयों ने तंत्र का पालन करने का आदेश दिया है, बावजूद इसके अधिकारियों का दुरुपयोग किया जा रहा है। इस घटना से न्याय व्यवस्था की निष्पक्षता पर सवाल उठे हैं।
CJP ने वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल से सलाह लेकर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी है। संगठन का कहना है कि यदि सौरव दास और आशुतोष रांका को 18 अक्टूबर तक रिहा नहीं किया गया, तो वे अदालत में मामले को चुनौती देंगे।
पार्टी ने खासकर कड़ी सुरक्षा और प्रतिरोध के बावजूद विरोध प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तारी की निंदा की है। उनका कहना है कि राष्ट्रीय ध्वज फहराना कोई अपराध नहीं है और नेताओं की जेल में रखे जाना अनुचित है।
पुलिस ने इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, जबकि विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। विरोध मार्च “लेहरा दो तिरंगा” के दौरान भी कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया था।
यह मामला भारत के राजनीतिक वातावरण और प्रदर्शन अधिकारों पर बहस को बढ़ावा दे रहा है। CJP राजनीतिक दल पिछले कुछ समय से चुनाव आयोग और मतदाता सूची संशोधन की प्रक्रिया के खिलाफ प्रदर्शन कर रहा है। उनका दावा है कि इस प्रक्रिया से मतदाताओं के अधिकारों पर खतरा है।
इस विवाद के चलते न्यायपालिका, पुलिस और राजनीतिक दलों के बीच बढ़ती खिंचाव के कारण इस मामले का जल्द समाधान आवश्यक साबित हो रहा है। सरकार और विपक्ष इस पर अपने-अपने दृष्टिकोण से प्रकाश डाल रहे हैं।




