नई दिल्ली: 50 हजार रुपये के मुचलके पर सौरव दास और आशुतोष रांका को जमानत, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर लगाई गई शर्त

नई दिल्ली, दिल्ली। जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामले में सौरव दास और आशुतोष रांका को सात दिन जेल में रहने के बाद एसईएम कोर्ट से रिहाई मिल गई है। अदालत ने दोनों को 50-50 हजार रुपये के व्यक्तिगत मुचलके और जमानती मुचलके की शर्त पर हिरासत से मुक्त करने का आदेश दिया। रिहाई से पहले दोनों ने लिखित आश्वासन दिया कि वे आगे शांति भंग करने वाली किसी गतिविधि में शामिल नहीं होंगे और कानून-व्यवस्था बनाए रखेंगे।
अदालत के सामने दोनों ने न्यायपालिका और विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट (एसईएम) न्यायालय के प्रति विश्वास जताया। उन्होंने आश्वासन दिया कि भविष्य में वे ऐसा कोई काम नहीं करेंगे, जिससे सार्वजनिक शांति प्रभावित हो या कानून-व्यवस्था बिगड़ने की स्थिति बने।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए नहीं करेंगे आह्वान
इस मामले में रिहाई की प्रमुख शर्त जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन से संबंधित है। सौरव दास और आशुतोष रांका ने अदालत को लिखित रूप से आश्वासन दिया कि जब तक वहां विरोध प्रदर्शन को प्रतिबंधित करने वाला आदेश कानून के अनुसार लागू रहेगा, तब तक वे प्रदर्शन के लिए कोई आह्वान नहीं करेंगे।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में यदि कोई प्रदर्शन किया जाता है, तो वह संविधान के दायरे में रहकर होगा। अदालत ने दोनों को सार्वजनिक शांति बनाए रखने और मुचलकों के साथ दिए गए सभी आश्वासनों का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया है।
अदालत ने जांच जारी रखने की बात कही
अदालत ने साफ किया कि रिहाई का आदेश केवल हिरासत से मुक्त करने से संबंधित है। इससे मामला समाप्त नहीं होता और न ही इसे आरोपों से पूरी तरह बरी होना माना जा सकता है। मामले की जांच कानून के अनुसार जारी रहेगी और आगे की कार्रवाई निर्धारित न्यायिक प्रक्रिया के तहत की जाएगी।
दोनों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे अपनी रिहाई से जुड़ी शर्तों का उल्लंघन न करें। अदालत ने उनके जमानतदारों को भी अगली सुनवाई में उपस्थित रहने के लिए कहा है।
23 अक्टूबर को दोपहर तीन बजे होगी पेशी
सौरव दास, आशुतोष रांका और उनके जमानतदारों को 23 अक्टूबर को दोपहर तीन बजे एसईएम कोर्ट में पेश होना होगा। दोनों को प्रत्येक निर्धारित तारीख पर अदालत में उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है। अगली सुनवाई में मामले से संबंधित आगे की प्रक्रिया पर कार्रवाई होगी।
मुचलकों और आश्वासनों को माना पर्याप्त
अदालत ने अपने आदेश में माना कि दोनों की ओर से दिए गए व्यक्तिगत मुचलके, जमानती मुचलके और स्वैच्छिक लिखित आश्वासन फिलहाल शांति तथा सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक एहतियाती उपाय सुनिश्चित कर सकते हैं। इसी आधार पर इस स्तर पर आगे न्यायिक हिरासत जरूरी नहीं समझी गई।
हालांकि, रिहाई के बाद भी दोनों को अदालत की सभी शर्तों का पालन करना होगा। जांच जारी रहने के कारण मामले में कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। अगली सुनवाई 23 अक्टूबर को निर्धारित है, जिसमें दोनों की उपस्थिति अनिवार्य रहेगी।
