टांजामानिया के कैद विपक्षी नेता टुंदु लिस्सू ने वकीलों से मिलने की अनुमति न मिलने पर भूख हड़ताल की योजना बनाई

टांजामानिया के विपक्षी नेता टुंदु लिस्सू ने जेल में कैद रहते हुए कंट्रोलरों द्वारा वकीलों से निजी मुलाकात की अनुमति न दिए जाने के विरोध में भूख हड़ताल शुरू करने का निर्णय लिया है। उनकी इस रणनीति का ऐलान उनके वकील ने शनिवार, 24 अक्तूबर, 2026 को किया।
टुंदु लिस्सू की न्यायिक लड़ाई और भूख हड़ताल
टुंदु लिस्सू पर देशद्रोह का आरोप है, जिसके खिलाफ उन्हें फांसी की सजा भी हो सकती है। चाडेमा पार्टी के प्रमुख रहे लिस्सू को इस अपराध के तहत पिछले 18 महीने से जेल में रखा गया है। उनकी अंतिम सुनवाई 6 नवंबर को तय है।
लिस्सू ने 2017 में एक जानलेवा हमला झेला था, जिसमें उन्हें 16 गोलियां लगी थीं। इसके बावजूद वह विपक्षी आवाज बनकर सक्रिय हैं। उनके वकील रूजेमेलेजा नशाला ने बताया कि जेल में हुए हालिया मुलाकात में लिस्सू ने भूख हड़ताल की योजना साझा की।
रूजेमेलेजा ने पत्रकारों से कहा कि उन्होंने लिस्सू को उनकी सेहत के नजरिए से चेतावनी दी लेकिन लिस्सू अपने निर्णय पर दृढ़ रहे और उन्होंने कहा, “मैं जिम्मेदारी भुगतने को तैयार हूं, लेकिन मैं कानून व्यवस्था के लिए लड़ूंगा।”
वकीलों से मिलने की अनुमति न मिलना और राजनीतिक पृष्ठभूमि
लिस्सू के वकील ने बताया कि कोर्ट के आदेश के बावजूद उन्हें अपने वकीलों से निजी तौर पर मिलने की अनुमति नहीं दी गई। कभी-कभी तो पूरी तरह उनसे मिलने पर भी रोक लगा दी गई। लिस्सू ने सवाल उठाया कि क्यों कोर्ट के आदेश को इस तरह नजरअंदाज किया जा रहा है जबकि कैद में रखने के आदेश पर सख्ती दिखाई जा रही है।
लिस्सू को 9 अप्रैल, 2025 को गिरफ्तार किया गया था। वे उस समय एक चुनावी सुधार की रैली को संबोधित कर रहे थे। अगले दिन उन पर देशद्रोह का आरोप लग गया। वे हत्या की साजिश और जानलेवा हमले के डर से कई बार निर्वासन में भी रहे।
टांजामानिया के दो मुख्य विपक्षी दलों के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों को अक्टूबर 2025 के चुनाव में हिस्सा लेने से रोका गया था, जिससे देश में विरोध प्रदर्शन और हिंसा भड़क उठी। एक जांच रिपोर्ट के अनुसार इस चुनाव हिंसा में कम से कम 518 लोगों की मौत हुई।
संयुक्त राष्ट्र ने भी इस मामले की जांच का आग्रह किया था, खासकर मौतों और पुलिस द्वारा शवों को गुप्त स्थानों पर ले जाने की रिपोर्ट के बाद। चाडेमा पार्टी का दावा है कि हताहतों की संख्या लगभग 2000 है, जिसे संयुक्त राष्ट्र ने चुनाव के दौरान इंटरनेट बंद और सुरक्षा की स्थिति को लेकर प्रमाणित नहीं किया।




