तमिलनाडु स्वास्थ्य विभाग ने कर्मचारियों को केंद्र व राज्य सरकार की नीतियों की सार्वजनिक आलोचना से रोका

तमिलनाडु स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने 19 अक्टूबर को एक सर्कुलर जारी किया है जिसमें सार्वजनिक स्वास्थ्य और रोकथाम चिकित्सा निदेशालय के कर्मचारियों को केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों की सार्वजनिक आलोचना करने से रोक दिया गया है। इस आदेश के अनुसार, सरकारी कर्मचारी न तो किसी सार्वजनिक स्थान पर और न ही मीडिया या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सरकार की नीतियों की नकारात्मक टिप्पणी कर सकते हैं।
सरकारी आदेश और नियम
डॉ. ए. सोमसुंदरम, निदेशक, सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं रोकथाम चिकित्सा ने जारी किए गए सर्कुलर में बताया कि तमिलनाडु सरकारी कर्मचारियों के आचरण नियम, 1973 के नियम 12 के तहत, कोई भी कर्मचारी केंद्र या राज्य सरकार की नीतियों, कार्यक्रमों या कार्यों की आलोचना करने से प्रतिबंधित है। नियम यह भी स्पष्ट करता है कि कर्मचारियों को अधिकारियों या सरकारी संस्थाओं के बीच अच्छे संबंध बनाए रखनें के लिए किसी भी स्थिति में नकारात्मक विचार व्यक्त नहीं करने चाहिए।
सर्कुलर में यह भी उल्लेख है कि कर्मचारी उन अनधिकृत बैठकों में भाग नहीं लेंगे जहाँ सरकार की आलोचनात्मक प्रस्ताव या भाषण दिए जाते हैं। इस आदेश के उल्लंघन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
सरकार की सार्वजनिक संचार नीति
यह आदेश तमिलनाडु की वर्तमान सरकार की जनता के साथ संचार नीति पर भी प्रश्न खड़े करता है। सीएम सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेत्री काजगम (टीवीके) सरकार मीडिया से दूरी बनाए रखने के लिए जानी जाती है। मई में सत्ता में आने के बाद, मुख्यमंत्री विजय ने कोई भी औपचारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित नहीं की है और न ही पत्रकारों के सीधे सवालों के जवाब दिए हैं।
सरकार के संचार का दायरा विधानसभा भाषणों, आधिकारिक बयानों, पूर्व रिकॉर्डेड वीडियो संदेशों और सोशल मीडिया तक सीमित है। मंत्री और विधायक भी मीडिया से सीधे संवाद से बचते हैं। टीवीके सरकार इस मौन नीति को “कम बोलो, ज्यादा काम करो” की शैली बताती है जिसे वे शासन पर ध्यान केंद्रित करने वाला मानते हैं।
हाल ही में विपक्ष ने इस सरकार पर पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया था। आरटीआई के तहत जारी एक जवाब में सरकार ने पत्तिनपक्कम में नए सचिवालय स्थल के चयन की प्रक्रिया की जानकारी न होने की बात कही। डीएमके सांसद कानीमोधि ने सवाल उठाया कि क्या इस चयन में कोई व्यवहारिक विश्लेषण हुआ या यह निर्णय ज्योतिष पर आधारित था।
इसके पहले भी सरकारी तथ्य जांच इकाई के पुनर्गठन, कर्मचारियों, वेतन और प्रशासन संबंधी जानकारी आरटीआई के तहत देने से सरकार ने इनकार कर दिया था। इसने भारतीय आरटीआई अधिनियम की धारा 7(9) का हवाला दिया।
इस प्रकार यह नया सर्कुलर तमिलनाडु सरकार की सरकारी कर्मचारियों और उनकी सार्वजनिक अभिव्यक्ति पर नियंत्रण की स्पष्ट नीति को दर्शाता है जो सरकारी और सार्वजनिक संवाद के तरीके को सीमित करता है।




