पॉलिटिक्स

सुप्रीम कोर्ट ने काशी मठ मामले में केरल हाई कोर्ट के आदेश की पुष्टि की

सुप्रीम कोर्ट ने 15 सितंबर 2026 को केरल हाई कोर्ट के अगस्त 2026 के उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें काशी मठ संपन्न संस्थान से स्वामी राघवेंद्र तीर्थ द्वारा स्वर्ण और चांदी के आभूषण व धार्मिक सामग्री वापस लेने की कार्यवाही जारी रखने की अनुमति दी गई थी।

मुख्य विवाद और पिछला इतिहास

स्वामी राघवेंद्र तीर्थ ने विशेष अनुमति याचिका दायर की थी, जिसमें वे अपने आप को काशी मठ संस्थान के 21वें मताधिपति घोषित करना चाहते थे। इस मामले में केरल हाई कोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया है। यह विवाद पूर्व मताधिपति स्वामी सुधीन्द्र तीर्थ और स्वामी राघवेंद्र तीर्थ के बीच 2009 से शुरू हुआ था।

स्वामी राघवेंद्र तीर्थ ने तिरुपति जिला न्यायालय में अपने मताधिपति होने का दावा प्रस्तुत किया था। इसके खिलाफ सुधीन्द्र तीर्थ ने दायर मुकदमे में कथित तौर पर राघवेंद्र तीर्थ को कभी मताधिपति पद नहीं मिलने का विरोध किया था। 2009 में तिरुपति कोर्ट ने सुधीन्द्र तीर्थ के पक्ष में फैसला दिया और आदेश दिया कि राघवेंद्र तीर्थ सभी धार्मिक और संपत्ति सामान गुरु को सौंपें।

अदालत की कार्यवाही और अधिकारी हस्तक्षेप

सुधीन्द्र तीर्थ के इस फैसले के बाद कार्यवाही शुरू हुई, जिसे केरल के एर्नाकुलम कोर्ट में स्थानांतरित किया गया था। वहां उच्च न्यायालय ने तब के मताधिपति स्वामी सय्यमिंद्र तीर्थ के पक्ष में पुलिस सहायता प्रदान की। मामला इतना संवेदनशील था कि सीबीआई को जांच के लिए भी तैनात किया गया, जिसमें 234 आभूषण, चांदी के आइटम और 27 मूर्ति शामिल हैं, जिनके स्वामी राघवेंद्र तीर्थ के पास होने का आरोप लगाया गया।

स्वामी सुधीन्द्र तीर्थ के निधन के बाद, सय्यमिंद्र तीर्थ ने खुद को नए मताधिपति के रूप में स्थापित करने की कोशिश की। यह उनकी 2003 में पंजीकृत विल और 2015 के घोषणा पत्र पर आधारित था, जिसमें सुधीन्द्र तीर्थ ने उनका नाम उत्तराधिकारी के रूप में रखा था।

हालांकि, स्वामी राघवेंद्र तीर्थ ने इस दावे का विरोध किया, कहा कि सय्यमिंद्र को तिरुपति कोर्ट का रुख करना चाहिए था। एर्नाकुलम कोर्ट ने 2019 में उनके तर्क को माना, पर केरल हाई कोर्ट ने अगस्त 2026 में इस निर्णय को उलट दिया। इसके बाद राघवेंद्र तीर्थ ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, लेकिन उनकी याचिका अस्वीकृत हो गई।

सुप्रीम कोर्ट के बेंच ने ये स्पष्ट किया कि याचिका में कोई महत्वपूर्ण आधार नहीं है और इसीलिए इसे खारिज किया गया है। इस निर्णय से काशी मठ संपन्न के स्वामी सय्यमिंद्र तीर्थ को संपत्ति की वसूली की कार्यवाही जारी रखने का अधिकार मिला।

यह मामला धार्मिक संस्थान की विरासत और उसके संपत्ति नियंत्रण से जुड़ा महत्वपूर्ण विवाद है, जिससे धार्मिक अनुयायियों और संबंधित पक्षों की रुचि बनी हुई है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला विवाद के निर्णायक पक्ष को मजबूत करता है।

आगे इस मामले में स्थानीय अदालतें और संबंधित पक्ष कार्यवाही पूरी कर रहे हैं तथा काशी मठ के धार्मिक और सांस्कृतिक अधिकारों की रक्षा करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

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