APEC से पहले अमेरिका और चीन के शीर्ष अधिकारी व्यापार संबंधों पर चर्चा

अमेरिका और चीन के शीर्ष अधिकारियों ने 6 नवंबर 2026 को चीन में होने वाले एशिया-पैसिफिक सम्मेलन से पहले दो देशों के व्यापार संबंधों को लेकर गंभीर और खुले तौर पर बातचीत की। इस वार्ता का मकसद दोनों देशों के बीच बढ़ते व्यापार विवादों को समझना और समाधान निकालना था।
क्या चर्चा के दौरान प्रमुख मुद्दे थे?
इस बातचीत में अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रियर ने चीन के उप प्रधान मंत्री हे लिफेंग के साथ आर्थिक और व्यापार प्रतिबद्धताओं की समीक्षा की। अमेरिकी पक्ष ने जोर दिया कि चीन को अपनी प्रतिबद्धताओं को तुरंत और पूरी तरह लागू करना चाहिए। वे चीन की कुछ हाल की नीतियों को लेकर चिंतित भी थे।
इसके विपरीत, चीन ने भी हाल ही में अमेरिकी व्यावसायिक प्रतिबंधों को लेकर गंभीर आपत्तियां जताईं, जो अमेरिका ने कुछ चीनी कंपनियों, विशेषकर क्यूबा को लक्षित कर लगाए हैं। चीन का मानना है कि ये प्रतिबंध अमेरिका और चीन के बीच पहले हुए समझौतों के खिलाफ हैं।
एशिया-पैसिफिक समिट में क्या अपेक्षाएं हैं?
चीन इस साल 18-19 नवंबर को शेनझेन में APEC सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है, जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की त्रिपक्षीय बैठक की संभावना है। बीजिंग के विदेश मंत्रालय ने इस बैठक की तैयारियों के संबंध में दोनों देशों के साथ संपर्क बनाये रखने की जानकारी दी है।
आंकड़ों के अनुसार, 2025 के अक्टूबर में दक्षिण कोरिया के बुसान में हुए एक समझौते के तहत, चीन ने इस साल और 2028 तक अमेरिका से सोयाबीन खरीदने और कुछ निर्यात नियंत्रणों को रोकने पर सहमति जताई थी। इस समझौते के बाद दोनों देशों ने व्यापार तनावों को कम करने का प्रयास किया है।
हालांकि, दोनों पक्ष अभी भी व्यापार प्रतिबंधों, विशेष रूप से दुर्लभ पृथ्वी तत्वों के निर्यात को लेकर अपने मतभेदों का समाधान नहीं कर पाए हैं। ये दुर्लभ तत्व स्मार्टफोन, ऑटोमोबाइल और सेना के उपकरणों के लिए बहुत महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
“अमेरिका ने कहा कि भविष्य की प्रगति के लिए ठोस परिणाम जरूरी हैं और वे चीन की प्रतिबद्धताओं के अनुरूप कार्यों का ध्यानपूर्वक आकलन करेंगे,” ट्रेजरी विभाग ने बताया।
दोनों देशों ने इस महत्वपूर्ण वार्ता में अपने मतभेदों को उचित तरीके से संभालने और स्थिर व्यापार संबंध बनाए रखने की सहमति जताई है। हालांकि, अभी कई वार्ता बिंदु खुले हुए हैं और आने वाले महीनों में इनके समाधान की उम्मीद है।
इस बातचीत का उद्देश्य स्थायी समाधान खोजना और वैश्विक आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाना है, जो दोनों देशों के आर्थिक हितों के लिए महत्वपूर्ण है।




