अरुणाचल में चीन सीमा विवाद पर कांग्रेस ने केंद्र की चुप्पी पर हमला किया

कांग्रेस ने अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सुरक्षा बलों और चीनी सैनिकों के बीच हाल ही में हुई झड़पों पर केंद्र सरकार की चुप्पी को लेकर शुक्रवार को तीखा हमला किया। कांग्रेस के महासचिव जयराम रमेश ने इस मामले पर सरकार की ओर से कोई प्रतिक्रिया न देने की निंदा की।
अरुणाचल में सीमा विवाद और मौन
जयराम रमेश ने एक पोस्ट में कहा कि भारत के प्रधानमंत्री और उनकी सरकार ने अरुणाचल प्रदेश में चीनी पीएलए के साथ हुई झड़पों पर कोई समर्थक प्रतिक्रिया नहीं दी है जबकि आईटीबीपी के डीजी ने भारतीय बलों की भूमिका की सराहना की है। उन्होंने बताया कि पिछले महीने तक्षिंग के विवाद के बाद वाचा और दामई में कॉर्प्स कमांडर स्तर की वार्ताएं हुईं, जहां स्थानीय लोगों ने बताया कि कई पेट्रोलिंग पॉइंट्स फिर चीन के हाथ चले गए हैं।
रमेश ने यह भी कहा कि चीन अरुणाचल प्रदेश के कई इलाकों के नाम बदल रहा है और वहां 60,000 मेगावाट क्षमता का एक बांध बना रहा है, जो पारिस्थितिक और जल सुरक्षा के लिए खतरा है।
व्यापार घाटा और राजनीतिक आरोप
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी ट्वीट किया कि भारत सरकार को चीन को दिए जा रहे “साफ चिट” को खत्म करना चाहिए और प्रधानमंत्री मोदी को स्पष्ट होना चाहिए।
जयराम रमेश ने भारत के चीन के साथ बढ़ते व्यापार घाटे पर चिंता जताई और बताया कि 2025-26 में यह घाटा 112 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष के 99 अरब डॉलर से अधिक है। उन्होंने कहा कि इस व्यापार घाटे ने भारत की एमएसएमई उद्योगों को बुरी तरह प्रभावित किया है और मेक इन इंडिया को चीन से आयात में बदल दिया है।
उन्होंने 19 जून 2020 के उस वक्त के प्रधानमंत्री के बयान को भी याद दिलाया, जब गलवान घाटी में 20 भारतीय सैनिक शहीद हुए थे और उस वक्त मोदी सरकार ने दावा किया था कि किसी ने सीमा में घुसपैठ नहीं की है।
जयराम रमेश ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम. एम. नरवणे के कथन का हवाला भी दिया, जिन्होंने बताया कि चीन की घुसपैठ के दौरान उन्हें “जो उचित समझो करो” के निर्देश मिले थे। इस साथ ही उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन की भूमिका के विषय में दी गई सेना के उच्च अधिकारियों की बातचीत पर सवाल उठाए।
वहीं, आईटीबीपी के डायरेक्टर जनरल शत्रुजीत कपूर ने पुष्टि की कि अरुणाचल प्रदेश में कई स्थानों पर चीनी सैनिकों के साथ मुठभेड़ें अभी भी जारी हैं। उन्होंने बताया कि आईटीबीपी के हथियार पुराने हैं और उन्हें आधुनिक बनाने की जरूरत है। कपूर ने ड्रोन और अंडरग्राउंड शेल्टर्स की अहमियत पर भी ज़ोर दिया, जो भविष्य की लड़ाइयों में जरूरी होंगे।
अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी जिले में तक्षिंग के पास की झड़पें जुलाई के अंत में शुरू हुईं, जब भारतीय और चीनी बलों की टोह लेने वाली टीमें आमने-सामने आ गईं। इसके बाद चीन ने लगभग 6-7 किलोमीटर तक एलएसी के अंदर अपने शिविर बसाए, जिसके जवाब में भारत ने अपनी तैनाती बढ़ा दी।
इन झड़पों के बीच दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और सैन्य वार्ताएं भी हुईं, जैसे अगस्त में सीमा मामलों पर वार्ता मंच की बैठक और सितंबर में कॉर्प्स कमांडर की बैठक। चीनी राष्ट्रपति सी जिनपिंग के सितंबर में भारत दौरे के दौरान भी झड़पें जारी रहीं।




