यूपी में 2027 चुनाव से पहले चिराग पासवान कर रहे हैं पासी वोटरों को लक्षित

लखनऊ: लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज कर दी हैं। पार्टी राज्य में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की तैयारी में है और इसके तहत प्रमुख क्षेत्रों में संगठनात्मक कामकाज शुरू किया गया है।
चुनावी रणनीति और आगामी कार्यक्रम
हाल ही में लखनऊ में राम विलास पासवान की पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और अन्य नेता शामिल हुए। यह सभा राज्य में विधानसभा चुनावों से पहले लोक जनशक्ति पार्टी का बड़ा आयोजन था। पासवान ने कहा कि पार्टी पूरे राज्य की 403 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की योजना बना रही है, लेकिन भाजपा के साथ गठबंधन या सीटों के बंटवारे की संभावना भी बनी हुई है।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि पूर्वांचल और अवध क्षेत्र की लगभग 100 विधानसभा सीटें चुनी गई हैं, जहां पासी समुदाय की संख्या अधिक है, और उन क्षेत्रों में पार्टी संगठन पर खास ध्यान दिया जा रहा है।
पासी समुदाय और राजनीतिक स्थिति
उत्तर प्रदेश में दलित वोट की अहमियत बढ़ रही है, जिसमें पासी समुदाय लगभग 9 प्रतिशत मतदाता हैं। वे मुख्य रूप से प्रदेश के मध्य और पूर्वी हिस्सों में लगभग 15 प्रतिशत मतदाता हैं। इस समुदाय को भजपा, बसपा, सपा समेत कई दल ध्यान में रख कर अपनी रणनीति बना रहे हैं।
लोक जनशक्ति पार्टी पारंपरिक रूप से दलित समर्थक रही है और चिराग पासवान चाहते हैं कि वे इस क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाएं। पार्टी ने पासी वोटरों के लिए ‘‘पासी-पासवान सम्मान शौर्य यात्रा’’ और दलित चौपाल की योजना बनाई है। साथ ही ब्राह्मण समुदाय के लिए भी कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
पार्टी के यूपी प्रभारी सांसद अरुण भारती ने कहा कि चिराग पासवान ने अभी तक 403 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी रखी है, लेकिन अंतिम फैसला चुनाव के करीब लिया जाएगा। 2027 के चुनाव जिम्मेदारी के अनुसार वे गठबंधन या अकेले चुनाव लड़ सकते हैं।
चिराग पासवान हाल ही में लखनऊ और प्रयागराज में युवा मतदाताओं को लक्षित करते हुए कार्यक्रम कर चुके हैं। आगे वाराणसी, गोरखपुर और कानपुर में इसी तरह की बैठकों की योजना है। पार्टी का लक्ष्य है कि 2027 के चुनावों तक पासी और युवा मतदाताओं के बीच प्रभावी उपस्थिति बनाए।
सियासी विश्लेषकों की मानें तो अगर पासवान दलित मतदाताओं के बीच अपनी अलग राजनीतिक छवि बनाने में सफल रहे, तो यह यूपी की राजनीति में बड़े बदलाव ला सकता है। उनकी कोशिश यूपी में गैर जाटव दलित वोटरों का समर्थन जीतने की है, जिससे भाजपा और विपक्षी गठबंधन दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
वहीं, समाजवादी पार्टी भी 2027 के चुनावों में पासी समुदाय के लिए उम्मीदवार उतारने पर विचार कर रही है ताकि दलित वोटों को मजबूत किया जा सके। भाजपा के वरिष्ठ नेता भी लोक जनशक्ति पार्टी के विस्तार के प्रति सकारात्मक हैं और दोनों दलों के बीच कुछ समझौते की संभावना मानते हैं।




