कॉर्नेल यूनिवर्सिटी दुष्कर्म पीड़िता के समर्थन में महिलाएं घोषित करती हैं #IamJaneDoe

2024 में कॉर्नेल यूनिवर्सिटी में एक दुष्कर्म मामले को लेकर महिलाओं ने सोशल मीडिया पर #IamJaneDoe हैशटैग के साथ एकजुटता दिखाई है। इस अभियान में महिलाएं खुद को जेन डो के रूप में प्रस्तुत कर रही हैं, जो उस पीड़िता का छद्म नाम है जिसने आरोप लगाया है कि उसे सात फ्रैटर्निटी सदस्यों ने दुष्कर्म किया था।
मामले की कानूनी स्थिति और समर्थन
20 वर्ष की पीड़िता ने 16 सितंबर को मुकदमा दायर किया, जिससे कानूनगो इस मामले की फिर से जांच करने लगे। न्यू यॉर्क राज्य के गवर्नर कैथी होचुल ने इस मामले में विशेष अभियोजक नियुक्त किया है। आरोपित व्यक्ति सभी आरोपों को अस्वीकार कर चुके हैं, जबकि कॉर्नेल यूनिवर्सिटी ने अपने कार्रवाई के तरीके का बचाव किया है।
पीड़िता के वकील थॉमस गिउफरा के अनुसार, सोशल मीडिया पर कुछ लोग पीड़िता की असली पहचान जानने और उसे सार्वजनिक करने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे उन्हें मानसिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है। इस विषय पर पत्रकार माइकल ट्रेसी ने पीड़िता की पहचान खुलासा करने की कोशिश की, जिसे कई लोगों ने निंदनीय बताया।
सोशल मीडिया पर हो रही प्रतिक्रिया और समर्थन
डेनवर की लेखिका एवं अभिनेता ट्वाना ला ट्राइस हिल ने #IamJaneDoe के साथ सोशल मीडिया पर आवाज उठाई है। वे कहती हैं कि पीड़िता को अपनी पहचान खुलासा करने का पूरा अधिकार है और अगर वे नहीं चाहतीं तो उसकी भी इज्जत होनी चाहिए।
अमि वेंडरपूल समेत कई अन्य महिलाओं ने दावा किया है कि वे भी #IamJaneDoe हैं, जिससे यह आंदोलन और मजबूत हो रहा है। कैटी जैकबसन, जो बच्चों के साथ काम करती हैं, ने बताया कि इस अभियान से अन्य पीड़ितों को सहारा मिलता है और वे अकेले महसूस नहीं करते।
संयुक्त राज्य की सीडीसी की रिपोर्ट के अनुसार 21% महिलाएं दुष्कर्म की शिकार हो चुकी हैं। वहीं, कॉर्नेल यूनिवर्सिटी के एक सर्वे के अनुसार 35% महिला विद्यार्थी बिना सहमति के शारीरिक संपर्क के अनुभव से गुजर चुकी हैं, जो 2021 के 20% से बढ़ा है।
अभियानकर्ता पीड़िताओं को RAINN जैसी संगठन की सहायता लेने की सलाह देते हैं जो राष्ट्रीय यौन उत्पीड़न हॉटलाइन संचालित करता है। कई समर्थक इस बात पर जोर देते हैं कि इस मामले में पीड़िता की गरिमा और सहायता सबसे महत्वपूर्ण है, न कि आरोपितों की पहचान को उजागर करना।
मामले को लेकर कानूनी और सामाजिक स्तर पर सक्रियता जारी है। आरोपितों के खिलाफ मुकदमा चल रहा है, जबकि समाज में यौन उत्पीड़न के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने के लिए यह आंदोलन महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पीड़िताओं को उचित न्याय और सम्मान मिलना इसका मुख्य उद्देश्य है।




