स्वास्थ्य

फेरिटिन फेस क्या है और क्यों सोशल मीडिया पर हो रहा है ट्रेंड

फेरिटिन फेस और आयरन डेफिशिएंसी से जुड़ी स्वास्थ्य चिंताएं सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में हैं। हमारे शरीर की त्वचा, बाल और नाखूनों को सही विकास और पुनर्निर्माण के लिए प्रोटीन, विटामिन, खनिज और ऊर्जा की आवश्यकता होती है। जब ये पोषक तत्व लंबे समय तक कमी में रहते हैं तो शरीर पर इसके स्पष्ट संकेत दिखते हैं।

पोषण संबंधी कमी के लक्षण

आयरन की कमी, खासकर जब यह एनीमिया तक बढ़ जाती है, तो त्वचा और म्यूकस मेम्ब्रेन में फीका रंग दिखता है, जिससे बाल झड़ने की समस्या भी हो सकती है। साथ ही, चम्मच के आकार के नाखून भी आयरन कम होने पर बन सकते हैं। विटामिन बी12 की कमी से खुजली और त्वचा पर अधिक पिग्मेंटेशन हो सकता है। डिफ़िशियेंसी से जुड़ी अन्य समस्याओं में विटामिन सी की कमी से मसूड़ों से खून आना और चोट लगने पर धीमी रिकवरी शामिल है।

जिंक की कमी से त्वचा की मजबूती और बालों की बढ़वार प्रभावित होती है जबकि प्रोटीन की कमी बालों की गुणवत्ता और त्वचा के बदलाव ला सकती है। विटामिन ए और आवश्यक फैटी एसिड की कमी से त्वचा सूखी या खुरदरी हो सकती है। मुँह के किनारों पर फटने जैसी समस्याएं आयरन, बी12, जिंक या राइबोफ़्लाविन की कमी के कारण हो सकती हैं। एक चिकनी और सूजी हुई जीभ भी कई विटामिन और आयरन की कमी से सम्बंधित होती है।

फेरिटिन फेस का सही मतलब

सोशल मीडिया पर ‘फेरिटिन फेस’ या ‘आयरन डेफिशिएंसी फेस’ जैसे शब्द लोकप्रिय हो रहे हैं लेकिन इन्हें चिकित्सा के दृष्टिकोण से मान्यता नहीं मिली है। फेरिटिन एक प्रोटीन है जो शरीर में आयरन को संग्रहित करता है और इसके स्तर से आयरन की स्थिति का पता चलता है।

आयरन की कमी एनीमिया का कारण बन सकती है, जिससे त्वचा की पीलापन हो सकता है, पर इसका कोई विशिष्ट चेहरे का लक्षण नहीं होता। अपोलो स्पेशलिटी हॉस्पिटल के वरिष्ठ त्वचाविज्ञानी पुष्पा ज्ञानराज के अनुसार, एनीमिया में त्वचा, होंठ, मसूड़े और आंखों की भीतरी झिल्ली पीली दिख सकती हैं, लेकिन चेहरे पर धुंधलापन या काले घेरे सीधे तौर पर आयरन की कमी से जुड़ा नहीं होता।

चेनई के SIMS हॉस्पिटल की प्रमुख आहार विशेषज्ञ विनिता कृष्णन बताती हैं कि आयरन की कमी से जुड़ी बाहरी लक्षण सामान्यतया हल्के और अस्पष्ट होते हैं। तनाव, नींद की कमी, जलयोजन की कमी, एलर्जी, उम्र बढ़ना और थायराइड समस्याएं भी समान लक्षण उत्पन्न कर सकती हैं।

इसलिए सही निदान के लिए चिकित्सीय इतिहास और जांच बहुत जरूरी है। यदि आवश्यक हो तो खून की पूरी जांच, फेरिटिन स्तर, आयरन स्तर, विटामिन B12, विटामिन D और थायराइड परीक्षण किए जाते हैं। त्वचा रोग जांच भी आवश्यक हो सकती है ताकि संक्रमण या अन्य समस्याओं को बाहर किया जा सके।

जब पोषण की कमी पक्की हो जाती है तो उसमें सुधार लाने से लक्षणों में राहत मिल सकती है। योग्य इलाज से पीलापन कुछ ही हफ्तों में कम हो सकता है, जबकि बालों के झड़ने जैसे लक्षणों में सुधार में समय लग सकता है। नैल बदलाव और बालों की वृद्धि के लिए महीनों की रिकवरी जरूरी हो सकती है।

स्वस्थ और विभिन्न प्रकार के भोजन लेना पोषण संबंधी कमी से बचाव का मुख्य आधार है। प्रोटीन, फलियां, साबुत अनाज, सब्जियां, फल, दूध, मछली और अंडे सही मात्रा में लेने से शरीर को आवश्यक पोषक तत्व मिलते हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि बिना जांच और सलाह के सप्लीमेंट्स लेना गलत है क्योंकि इससे शरीर पर विपरीत प्रभाव हो सकता है। इसलिए लंबी अवधि से बने लक्षणों के लिए चिकित्सकीय मार्गदर्शन जरूरी है।

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