उत्तराखंड कांग्रेस में हरीश रावत का ‘धन्यवाद यात्रा’ जारी रखने का फैसला

उत्तराखंड में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कांग्रेस उच्च नेतृत्व के निर्देशों के बावजूद अपनी ‘धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा’ सोमवार से जसपुर से हल्द्वानी तक शुरू कर दी है। पार्टी के आदेशों के खिलाफ यह कदम तब उठाया गया जब उन्हें अपनी सार्वजनिक कार्यक्रमों को स्थगित करने को कहा गया था।
कांग्रेस नेतृत्व और रावत के बीच मतभेद
कांग्रेस महासचिव और उत्तराखंड प्रभारी कुमारी सेलजा ने 1 अक्टूबर को रावत को पत्र लिखकर यात्रा रोकने का अनुरोध किया था। इसके अलावा, 30 सितंबर को दिल्ली में कांग्रेस कार्य समिति की बैठक के दौरान भी KC वेणुगोपाल ने रावत को पार्टी की चिंताओं से अवगत कराया था। सेलजा ने अपने पत्र में यात्रा के बारे में न तो खुद से और न ही उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोड़ियाल से चर्चा किए जाने की बात कही। उन्होंने उसपर कुछ विवादास्पद बयानों का भी जिक्र किया और विधानसभा चुनाव 2027 से पहले पार्टी के एकजुट होने की जरूरत बताई।
“राज्य में आपकी यात्रा की जानकारी हमें नहीं थी और आपने कुछ विवादास्पद बयान भी दिए हैं। आगामी चुनाव को देखते हुए पार्टी को एकजुट होना आवश्यक है। इस समय ऐसा कोई भी कार्यक्रम पार्टी के हित में नहीं है,” सेलजा ने अपने पत्र में लिखा।
यात्रा जारी रखना और राजनीतिक महत्व
किंतु रावत ने इस पत्र के बावजूद यात्रा शुरू कर दी। उनका दावा है कि यह यात्रा जनता का धन्यवाद करने और 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मतदाताओं से जुड़ने का प्रयास है। यह कदम ऐसे समय पर आया है जब उत्तराखंड कांग्रेस में उनके प्रभाव और पार्टी में उनके परिवार के लिए राजनीतिक स्थान बनाए रखने पर चर्चा हो रही है।
3 अक्टूबर को रावत ने यात्रा की शुरुआत की घोषणा की और उसके बाद भी इसे प्रचारित करते रहे। यात्रा के पहले उन्होंने कहा, “चुनौती बड़ी है लेकिन उत्तराखंड के गौरव के लिए हमारा संकल्प मजबूत है। अब कोई रोक नहीं सकता। हमें कांग्रेस को फिर से सत्ता में लाना होगा।”
यात्रा के दौरान घर से बाहर आए लोगों ने उनके समर्थन में भारी उत्साह दिखाया। रावत ने रेलवे और CBI की जांच के खिलाफ लड़ाई के साथ इस यात्रा को जोड़ा। उन्होंने कहा कि हजारों लोग दिल्ली और गुरुग्राम में उनसे मिलने आए और उन्होंने ED और भाजपा की चुनौती को स्वीकार करते हुए यह यात्रा शुरू की।
यात्रा के बाद, कुमारी सेलजा ने कहा कि वह रावत से 7 या 8 अक्टूबर को मिलकर उनकी सफाई सुनेंगी और फिर आगे का कदम तय करेंगे।
पार्टी के अन्य नेताओं के अनुसार, रावत अपने बच्चों के लिए राजनीतिक स्थान तैयार कर रहे हैं। 2024 लोकसभा चुनाव में रावत ने अपने पुत्र विरेन्द्र रावत को हरिद्वार से टिकट दिलाने की कोशिश की थी, लेकिन वह हार गए।
रावत का चुनाव इतिहास भी पार्टी के अंदर चर्चा का विषय रहा है। वे पिछले नौ वर्षों में विधानसभा या लोकसभा चुनाव नहीं जीत पाए हैं। 2017 में दो विधानसभा सीटों से हारने के बाद 2019 लोकसभा चुनाव और 2022 विधानसभा चुनाव में भी वे चुनाव हारे। उनकी बेटी अनुपमा रावत ने 2022 में हरिद्वार की विधानसभा सीट जीती।




