कर्नाटक को अधर में पड़ा ₹38,000 करोड़ का ठेकेदारों का बकाया भुगतानों का मसला

कर्नाटक में कर्ज़ और भुगतान समस्या के बीच, राज्य ठेकेदार संघ ने कांग्रेस सरकार पर ₹38,000 करोड़ का बकाया भुगतान न करने का आरोप लगाया है। ठेकेदारों का कहना है कि सरकार ने चुनावों में उनका इस्तेमाल तो किया, लेकिन बाद में उनकी पुरानी बकाया राशि का भुगतान नहीं किया।
ठेकेदारों की मुश्किलें बढ़ीं
कर्नाटक ठेकेदार संघ के अध्यक्ष आर. मंजुनाथ ने बताया कि बकाया राशि वर्ष 2022 से जमा है, लेकिन भुगतान में देरी से वित्तीय दबाव और बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि सरकार को पहले अपनी बकाया राशि चुकानी चाहिए, न कि चुनावी वचन निभाने के लिए हमारे पैसे का इस्तेमाल करना चाहिए।
ये वचन पांच प्रमुख योजनाओं के लिए दिए गए थे, जिनका वित्तीय भार सालाना ₹50,000 करोड़ से अधिक है। इनमें शक्ति योजना (महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा), गृह ज्योति, गृह लक्ष्मी, अन्न भाग्य और युवा निधि शामिल हैं।
भ्रष्टाचार और दबाव के आरोप
ठेकेदार संघ ने विधायक interference पर भी आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि कई विधायक टेंडर देने और भुगतान की प्रक्रिया में कमीशन की मांग करते हैं। अगर नवंबर तक भुगतान नहीं हुआ, तो वे ऐसे आरोप लगाने वालों के नाम सार्वजनिक करेंगे।
ठेकेदार संघ के उपाध्यक्ष वी. कृष्ण रेड्डी ने कहा कि कई ठेकेदारों के घर जब्त हो चुके हैं और बैंकों की नोटिस आ रही हैं। बकाया भुगतान न होने से ठेकेदार गंभीर आर्थिक संकट में हैं।
सरकार के वित्तीय संकट को खराब बारिश और सूखे की स्थिति ने और जटिल बना दिया है। प्रशासन का कहना है कि यातायात निगम भी घाटे में हैं, और मुक्त यात्राओं के कारण उनके वित्तीय हालात और बिगड़ गए हैं।
मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने बताया कि ये सभी ठेके BJP सरकार के समय दिए गए थे। उन्होंने कमीशन संबंधी आरोपों की जांच कराने का आश्वासन दिया है और ठेकेदारों को अवैध मांगों की शिकायत करने को कहा है।
विपक्ष ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा है कि कुल ₹38,000 करोड़ के बकाया भुगतान में कमीशन की मांग की जा रही है, जिससे सरकार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगते हैं।




