कर्नाटक में विधायी परिषद चुनाव के बाद दूध की कीमत में 8 रुपये की वृद्धि संभव

कर्नाटक में कर्नाटक मिल्क फेडरेशन (KMF) द्वारा दूध की खरीद मूल्य में बढ़ोतरी को लेकर राज्य सरकार ने गुरुवार को बड़ी चर्चा की है। हालांकि, यह बढ़ोतरी तुरंत लागू नहीं होगी क्योंकि विधान परिषद चुनाव के कारण मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट प्रभावी है।
कर्नाटक के विभिन्न जिलों के दूध उत्पादकों ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से सैन धारा की मांग की थी कि KMF के नंदिनी ब्रांड के दूध की कीमत को प्रति लीटर 8 रुपये बढ़ाया जाए। मुख्यमंत्री ने इस बात की पुष्टि की थी कि इस पर निर्णय कैबिनेट द्वारा लिया जाएगा।
किसानों की मांग और चुनाव के बाद लागू होने की संभावना
एक वरिष्ठ मंत्री ने मीडिया को बताया कि राज्य में सूखे की स्थिति के कारण किसानों की परेशानी बढ़ गई है, और इसलिए दूध की खरीद मूल्य बढ़ाने की मांग उठी है। उन्होंने बताया, “मूल्य वृद्धि चुनाव के बाद लागू की जाएगी।” सरकार की योजना है कि इस सौदे के लिए चुनाव आयोग से अनुमति ली जाएगी।
एक अन्य मंत्री ने कहा कि यदि चुनाव आयोग अनुमति नहीं देता है, तो सरकार चुनाव समाप्त होने तक इस पर किसी तरह का निर्णय नहीं लेगी। इस कदम से यह स्पष्ट होता है कि सरकार चुनावी नियमों का पूरी तरह सम्मान करती है।
कैबिनेट और अन्य फैसले
सहकारी मंत्री लक्ष्मण सावड़ी ने प्रेस को बताया कि कैबिनेट में दूध की कीमत बढ़ाने का प्रस्ताव चर्चा के लिए रखा गया है, लेकिन अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। उन्होंने कहा, “हम चुनाव आयोग को इस प्रस्ताव के बारे में लिखेंगे, और जैसे ही अनुमति मिलेगी, निर्णय ले लिया जाएगा।”
इसके साथ ही कैबिनेट में राज्य सड़क परिवहन निगम की टिकट दरों में संशोधन का प्रस्ताव भी आया, लेकिन इस पर भी फिलहाल कोई निर्णय नहीं लिया गया। सरकार ने 304 करोड़ रुपये की लागत से 800 नए बीएस VI बसों की खरीद को मंजूरी दी है।
यह भी उल्लेखनीय है कि सरकार ने सार्वजनिक वितरण दुकानों के लिए इलेक्ट्रॉनिक वज़नी मशीनें, ई-पीओएस और आईरिस स्कैनर किराये पर लगाने को भी मंजूरी दी है, जो आने वाले समय में वितरण प्रणाली को बेहतर बनाने में मदद करेगी।
विधानसभा चुनावी विवाद में SIT गठित नहीं की जाएगी
सूत्रों के अनुसार, कैबिनेट में विशेष निर्वाचन सूची संशोधन (SIR) के संदर्भ में जारी विवाद भी अनौपचारिक रूप से चर्चा में रहा। सरकार ने अब तक किसी विशेष जांच टीम (SIT) के गठन की योजना नहीं बनाई है क्योंकि इससे किसी एक दल को निशाना बनाने का आरोप लग सकता है। कई FIR दर्ज हुई हैं, लेकिन पुलिस से कहा गया है कि वे अपने स्तर पर जांच जारी रखें।
इस तरह, कर्नाटक सरकार ने दूध की कीमत बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी देने का संकेत दिया है, लेकिन इसे लागू करने में चुनाव के नियमों का पूरा ध्यान रखा जाएगा। किसानों की स्थिति और दूध उत्पादकों की मांग को ध्यान में रखते हुए, यह कदम राज्य के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।




