कोलकाता हाईकोर्ट ने वेस्ट बंगाल सरकार से कहा कांग्रेस के नंदीग्राम उपचुनाव उम्मीदवार को जमानत मिलने पर चुनाव लड़ने दें

कोलकाता हाईकोर्ट ने मंगलवार, 22 सितंबर 2026 को पश्चिम बंगाल सरकार के वकील से कहा कि कांग्रेस के नंदीग्राम उपचुनाव उम्मीदवार मिलन प्रधान को अगर उन्हें जमानत मिलती है तो उन्हें चुनाव में उचित तरीके से भाग लेने दिया जाए। मिलन प्रधान पर कई मामलों में गिरफ्तारी के आदेश हैं, लेकिन कोर्ट ने कहा कि उन्हें बतौर उम्मीदवार उचित अवसर मिलना चाहिए।
मिलन प्रधान की गिरफ्तारी और न्यायिक हिरासत
मिलन प्रधान को 19 सितंबर को हल्दिया सब-डिविजनल कोर्ट ने चार गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंटों के तहत न्यायिक हिरासत में भेजा था जो 2007 के नंदीग्राम मामलों से जुड़े थे। इसके अलावा, 21 सितंबर को कंटई कोर्ट ने उन्हें हथियार अधिनियम के तहत दर्ज पुराने मामले में 14 दिनों की न्यायिक हिरासत दी। ये हिरासत 5 अक्टूबर तक चलती रहेगी।
नंदीग्राम में उपचुनाव 6 अक्टूबर को होना है, जबकि चुनाव प्रचार 4 अक्टूबर को समाप्त होगा। मतगणना की तारीख 9 अक्टूबर तय की गई है। इन हालात में, प्रधान की न्यायिक हिरासत उनके चुनाव प्रचार को प्रभावित कर रही है।
कोर्ट में दलीलें और स्थिति
प्रधान के वकील अयान भट्टाचार्य ने कंटई कोर्ट के निर्णय को चुनौती देने के लिए कोलकाता हाईकोर्ट में याचिका दायर की। प्रधान की ओर से यह भी कहा गया कि उनके खिलाफ 6 मामले हैं जिनमें पुलिस की जांच कार्रवाई से सुरक्षा की गुहार की गई है। राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि इनमें से पांच मामले पिछली सरकार ने वापस ले लिए हैं और एक मामले में प्रधान आरोपित नहीं हैं।
पश्चिम बंगाल के अतिरिक्त एडवोकेट जनरल राजदीप मजुमदार ने कोर्ट को बताया कि 11 आपराधिक मामले प्रधान के खिलाफ हैं, लेकिन जिन छह मामलों में सुरक्षा मांगी गई है, उनमें प्रधान से संबंधित कोई कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। कई मामलों के वारंट लंबे समय से लंबित थे। चुनाव आयोग की गाइडलाइन के अनुसार चुनाव से पहले इन वारंटों को निष्पादित करना पुलिस की जिम्मेदारी है।
न्यायमूर्ति सौगता भट्टाचार्य ने मौखिक निर्देश दिया कि यदि प्रधान को जमानत मिलती है तो उन्हें चुनाव लड़ने की उचित अनुमति दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि जिन मामलों में सुरक्षा मांगी गई है, उनसे जुड़ी कोई कार्यवाही फिलहाल न की जाए। इस मामले को आगे 12 अक्टूबर को फिर से सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।
मिलन प्रधान की गिरफ्तारी नंदीग्राम के 2007 के भूमि अधिग्रहण विरोध आंदोलन के दौरान दर्ज मामलों से हुई है। यह आंदोलन पश्चिम बंगाल की राजनीति में महत्वपूर्ण घटना रही है, जिसने 2011 में लेफ्ट फ्रंट सरकार के पतन में योगदान दिया था। प्रमुख राजनीतिक हस्ती और मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने 2026 विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम सीट जीती थी, बाद में उन्होंने भवानिपुर से भी जीत हासिल की, जिसके कारण नंदीग्राम में उपचुनाव की घोषणा हुई।
भले ही प्रधान जेल में हैं, लेकिन उनकी राजनीतिक भूमिका और उपचुनाव में भागीदारी की संभावना महत्वपूर्ण बनी हुई है। अदालत का निर्णय उनके चुनाव प्रचार और हिस्सेदारी को प्रभावित करेगा। अगली सुनवाई में यह स्पष्ट होगा कि उन्हें कितनी स्वतंत्रता दी जाएगी।
इस मामले में कोर्ट ने साफ किया है कि चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष और स्वतंत्र होनी चाहिए तथा राजनीतिक उम्मीदवारों को बाधित नहीं किया जाना चाहिए। पश्चिम बंगाल में नंदीग्राम उपचुनाव की राजनीतिक महत्वपूर्णता को देखते हुए यह मामला ध्यान बनाए हुए है।
मिलन प्रधान की जमानत पर फैसला आने के बाद ही उनकी चुनावी भागीदारी का रास्ता साफ होगा। इसके साथ ही, चुनाव आयोग और पुलिस प्रशासन की भूमिका भी इस संवेदनशील स्थिति में निगरानी के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।




