सऊदी अरब ने हौथी ड्रोन इंटरसेप्ट किए, मिस्र रक्षा समर्थन पर विचार कर रहा है

सऊदी अरब ने 17 अक्टूबर को रियाद, पूर्वी प्रांत और दक्षिणी क्षेत्रों में चार हौथी ड्रोन को इंटरसेप्ट और नष्ट करने की जानकारी दी है। यह कदम यमन के हौथी विद्रोहियों द्वारा की जा रही लगातार ड्रोन और मिसाइल हमलों के बीच आया है, जिससे सऊदी अरब की सुरक्षा स्थिति तनावपूर्ण हो गई है।
हौथी हमलों का बढ़ता खतरा
यमन में सऊदी अरब नेतृत्व वाली सेना, जो यमन की अंतरराष्ट्रीय रूप से मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन करती है, हौथियों से संघर्ष कर रही है। इरान समर्थित इस विद्रोही समूह ने सऊदी अरब के तेल प्रतिष्ठान, जहाजों और हवाई अड्डों को निशाना बनाया है। खासतौर पर रियाद के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुए हमले में 13 लोग मारे गए थे।
हौथी समूह के एक सैन्य प्रवक्ता ने 17 अक्टूबर को कहा कि सऊदी अरब ने पिछले 24 घंटों में राजधानी सना और छह अन्य प्रांतों में 53 हवाई हमले किए, जिनमें कई लोग घायल और मारे गए। इसके जवाब में, सऊदी गठबंधन ने हौथी ड्रोन को नष्ट करना जारी रखा है।
मिस्र की संभावित सैन्य मदद
मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फत्ताह अल-सिसी ने कहा है कि यदि सऊदी अरब सुरक्षा संबंधी समर्थन चाहता है, तो मिस्र हर संभव कदम उठाने को तैयार है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि मिस्र किसी क्षेत्रीय युद्ध में शामिल होने का इरादा नहीं रखता, लेकिन सऊदी अरब की सुरक्षा और स्थिरता खतरे में होने पर चुप रहना असंभव है।
मिस्र गठबंधन का सदस्य है और मुख्य रूप से लाल सागर में समुद्री सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करता रहा है, लेकिन हाल ही में यमन में सऊदी अरब के साथ ऐतिहासिक और आर्थिक संबंधों के कारण, रक्षा सहयोग पर विचार हो रहा है। मिस्र की संसद भी 18 अक्टूबर को एक आपात बैठक करेगी।
सऊदी अरब के हवाई अड्डे फिलहाल आंशिक रूप से बंद हैं, और विदेशी दूतावासों ने नागरिकों को अपनी उड़ानों और यात्रा पर सावधानी बरतने की सलाह दी है। रियाद और आसपास के क्षेत्रों में स्कूली बच्चों के लिए ऑनलाइन शिक्षा भी बढ़ा दी गई है।
सऊदी राजधानी के निवासियों को भी ‘‘शत्रु वायु खतरे’’ को लेकर अलर्ट जारी किया गया था, जिसमें उन्हें खिड़कियों और दरवाजों से दूर रहने को कहा गया था। यह अलर्ट कुछ मिनटों बाद हटा लिया गया।
इस बीच, सऊदी अरब ने इरान पर हौथी विद्रोहियों को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है, जिसे तेहरान ने खारिज किया है। इरानी विदेश मंत्री अब्बास अरकची ने क्षेत्रीय विवाद के स्थायी समाधान के लिए व्यापक राजनीतिक प्रक्रिया का समर्थन किया, साथ ही मध्यस्थता की पेशकश भी दोहराई।
यमनी विदेश मंत्री अफरा अल-जूबा ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार करते हुए कहा कि तेहरान युद्ध का हिस्सा है, मध्यस्थ नहीं। हौथी समूह स्वयं को स्वतंत्र बताते हैं, लेकिन वे और इरान दोनों मानते हैं कि वे ‘‘प्रतिरोध के धुरी’’ का हिस्सा हैं।




