थिरुवनंतपुरम निगम में भाजपा पार्षद आर. सुगथन के हस्ताक्षर फॉर्जी मामले की जांच शुरू

थिरुवनंतपुरम के निगम में भाजपा पार्षद आर. सुगथन के हस्ताक्षर में धोखाधड़ी के आरोप की जांच के लिए पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है। आरोप है कि निगम की हाजिरी रजिस्टर में उनके झूठे हस्ताक्षर दर्ज किए गए ताकि उनकी गैरमौजूदगी छुपाई जा सके। मामला गठबंधन के बीच खींचतान का भी कारण बन गया है।
हस्ताक्षर फॉर्जी का खुलासा एवं जांच के आदेश
सीसीटीवी फुटेज और हाजिरी रजिस्टर की जांच के लिए पुलिस को निर्देश दिए गए हैं। लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) के संसद दल नेता एस.पी. दीपक ने रविवार को इस संबंध में सरकार और जिला पुलिस प्रमुख को ज्ञापन सौंपा था। उन्होंने दस्तावेजों के आधार पर भाजपा पार्षद के फर्जी हस्ताक्षरों की जानकारी दी।
उन्हें बताया गया कि फरवरी 26, मार्च 11 और अप्रैल 27 को हुए निगम बैठक में भाजपा पार्षद के नाम पर फर्जी हस्ताक्षर प्राप्त हुए हैं। यह जानकारी सूचना के अधिकार (RTI) के तहत निकाली गई हाजिरी रजिस्टर की प्रतियों से मिली। इस प्रकार वे बैठक में मौजूद नहीं थे, फिर भी उनके हस्ताक्षर दिखाए गए।
राजनीतिक विवाद और आरोप-प्रत्यारोप
यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) के नेता के.एस. सबरीनाथन ने बताया कि गृह विभाग ने इस मामले की तात्कालिक जांच कराने का आश्वासन दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि जून 29 को हुए निगम के एक बैठक में भाजपा पार्षदों ने उन्हें और अन्य सदस्यों को इस विषय पर बोलने से रोकने का प्रयास किया। शिक्षा स्थायी समिति की अध्यक्ष चेंपासंथि उदयन समेत भाजपा सदस्य काफी आक्रामक रहे।
सबरीनाथन ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा सदस्यों ने बैठक के मिनट्स बुक को जबरदस्ती छीनने और नष्ट करने की कोशिश की, जो फर्जी हस्ताक्षर को छुपाने की कोशिश मानी जा रही है। दूसरी तरफ उपमहापौर जी.एस. अशानाथ ने आरोपों को नकारते हुए कहा कि हाजिरी रजिस्टर बैठक के दौरान ही लाया जाता है और सभी उपस्थित सदस्य बैठक के अंत तक हस्ताक्षर कर देते हैं।
अशानाथ ने फर्जी हस्ताक्षर के सवाल पर इसे गलत बताया और कहा कि जो लोग आरोप लगा रहे हैं, वे इसे साबित करें। उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं पता कि उस समय सीसीटीवी काम कर रहा था या नहीं। इस मामले में जांच आगे बढ़ेगी और तथ्य सामने आएंगे।
यह मामला निगम में पारदर्शिता और सरकारी प्रक्रियाओं पर उठाए गए प्रश्नों को और गहराता है। सीसीटीवी फुटेज और फौरेंसिक जांच जल्द ही विवाद सुलझाने में मदद कर सकते हैं। पुलिस के द्वारा पूरी ईमानदारी से जांच कर तथ्य सामने लाए जाने की उम्मीद है।
भाजपा और विपक्षी दलों के बीच विवाद सार्वजनिक ध्यान केंद्रित करता है कि चुनावी प्रतिनिधि कैसे अपनी जिम्मेदारी पूरी करते हैं और क्या वे स्थानीय प्रशासन में पारदर्शिता बनाए रखते हैं। सरकारी अधिकारियों और पुलिस की कार्रवाई पर भी नजर बनी रहेगी, ताकि जांच निष्पक्ष हो।
आगे की कार्रवाई के लिए अधिकारियों ने सभी सम्बंधित दस्तावेज और फुटेज की समीक्षा करनी शुरू कर दी है। सत्य के सामने आने के बाद भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के उपाय भी लागू किए जा सकते हैं। जनता इस मामले पर दोषियों को जिम्मेदार ठहराने की उम्मीद कर रही है।




