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अदाणी कच्छ कॉपर की क्षमता दोगुनी करने की तैयारी, दुनिया का सबसे बड़ा कॉपर स्मेल्टर बनाने का लक्ष्य

मुंद्रा, गुजरात। अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड की सहायक कंपनी कच्छ कॉपर लिमिटेड ने तांबा उत्पादन के क्षेत्र में विस्तार की बड़ी योजना बनाई है। कंपनी अपने मुंद्रा स्थित कॉपर स्मेल्टर की मौजूदा क्षमता 5 लाख टन प्रतिवर्ष से बढ़ाकर 10 लाख टन सालाना करना चाहती है। योजना पूरी होने पर यह संयंत्र दुनिया का सबसे बड़ा एकल-स्थान कस्टम कॉपर स्मेल्टर बन सकता है।

कंपनी ने अपनी पहली सस्टेनेबिलिटी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ पर्यावरणीय जिम्मेदारी, संसाधनों का कुशल इस्तेमाल और कार्बन उत्सर्जन में कमी पर भी ध्यान दिया जाएगा। इस योजना को भारत की बढ़ती तांबा जरूरतों और स्वच्छ ऊर्जा आधारित विकास से जोड़कर देखा जा रहा है।

नवीकरणीय ऊर्जा से घटेगा कार्बन फुटप्रिंट

कच्छ कॉपर अपने परिचालन में 115 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा जोड़ने की योजना बना रही है। कंपनी का उद्देश्य उत्पादन गतिविधियों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को कम करना है। नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन, बिजली ट्रांसमिशन और आधुनिक विद्युत प्रणालियों में तांबे की अहम भूमिका होती है। इन क्षेत्रों में निवेश बढ़ने से भविष्य में तांबे की मांग भी बढ़ने की संभावना है।

इसी को देखते हुए कंपनी अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ जिम्मेदार विनिर्माण प्रक्रियाओं को अपनाने पर जोर दे रही है। इससे भारत में घरेलू तांबा उत्पादन को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

जल संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण की पहल

कंपनी की रिपोर्ट के अनुसार, संयंत्र में लगभग 100 प्रतिशत डिसैलिनेटेड समुद्री जल का उपयोग किया जाता है। साथ ही, जीरो लिक्विड डिस्चार्ज नीति के जरिए औद्योगिक अपशिष्ट जल के बाहरी निर्वहन को रोकने और मीठे पानी पर निर्भरता कम करने का प्रयास किया जा रहा है।

सल्फर उत्सर्जन के उपचार को लेकर भी कंपनी ने महत्वपूर्ण दावा किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्नत पर्यावरणीय तकनीकों की मदद से 99.8 प्रतिशत सल्फर उत्सर्जन का उपचार किया जा रहा है। यह व्यवस्था औद्योगिक प्रदूषण को नियंत्रित करने और पर्यावरणीय प्रभाव कम करने के प्रयासों का हिस्सा है।

1.2 अरब डॉलर का निवेश, स्थानीय विकास पर भी ध्यान

अदाणी समूह ने कॉपर परियोजना में 1.2 अरब डॉलर का निवेश किया है। कंपनी के मुताबिक, आसपास के समुदायों के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा, आजीविका संवर्धन और सामाजिक विकास से संबंधित कार्यक्रम भी संचालित किए जा रहे हैं।

भारत ने 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य निर्धारित किया है। बिजली ग्रिड के विस्तार, नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं और इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती जरूरतों के बीच तांबे का महत्व लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में कच्छ कॉपर की क्षमता विस्तार योजना देश की औद्योगिक जरूरतों को पूरा करने और पर्यावरणीय लक्ष्यों के अनुरूप उत्पादन बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

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