ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती ने सामाजिक बराबरी को बढ़ावा दिया
अमीर और गरीब के बीच की दूरी खत्म करने की मिसाल कायम की: आफ़ाक़

सब तक एक्सप्रेस।
लखनऊ। राष्ट्रीय सामाजिक कार्यकर्ता तंजीम के कन्वीनर मुहम्मद आफ़ाक़ ने ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती अजमेरी के 814वें उर्स के अवसर पर देशवासियों को मुबारकबाद देते हुए कहा कि ख्वाजा साहब इंसानियत, प्रेम और सामाजिक समरसता के सबसे बड़े प्रतीक हैं।
उन्होंने कहा कि हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती अजमेरी धार्मिक और आध्यात्मिक जगत में सर्वोच्च स्थान रखते हैं। दुनिया उन्हें ख्वाजा, हिंदलवाली, सुल्तान-उल-हिंद और ख्वाजा गरीब नवाज जैसे सम्मानित खिताबों से जानती है। नफरत और भेदभाव के अंधेरे दौर में ख्वाजा साहब ने मोहब्बत और भाईचारे का दीया जलाया और इंसानियत को सर्वोपरि रखने का संदेश दिया।
मुहम्मद आफ़ाक़ ने कहा कि ख्वाजा साहब की शिक्षाएं मानव कल्याण, आपसी सम्मान और शांति पर आधारित थीं। उन्होंने समाज में व्याप्त ऊंच-नीच को चुनौती दी और अमीर-गरीब के बीच की खाई को पाटने की एक व्यावहारिक मिसाल पेश की। यही कारण है कि आज भी उनके संदेश में हर दिल को जोड़ने की ताकत मौजूद है।
उन्होंने कहा कि आज जरूरत है कि हम संत-महापुरुषों की शिक्षाओं को केवल मानें ही नहीं, बल्कि अपने आचरण में भी उतारें। भाईचारा, सद्भाव और सेवा की भावना को अपनाकर ही ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती का पैगाम जिंदा रखा जा सकता है।
अंत में उन्होंने कहा कि हम ख्वाजा साहब को मानते तो हैं, लेकिन उनके बताए रास्ते पर नहीं चल रहे हैं, यही वजह है कि समाज में आपसी दूरियां बढ़ रही हैं। यदि हम उनके सिद्धांतों को अपनाएं, तो इंसानियत और प्रेम का संदेश हर दिल तक पहुंचेगा।
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