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वाम दलों ने भाकपा (माले) राज्य सचिव सुधाकर यादव व नेताओं की गिरफ्तारी की निंदा, रिहाई की मांग

सब तक एक्सप्रेस।
लखनऊ। प्रदेश के प्रमुख वामपंथी दलों ने भाकपा (माले) के राज्य सचिव कॉमरेड सुधाकर यादव और अन्य नेताओं की मिर्जापुर में हुई गिरफ्तारी को अलोकतांत्रिक व दमनकारी कार्रवाई बताते हुए कड़ी निंदा की है। वाम दलों ने उनकी अविलंब और बिना शर्त रिहाई की मांग की है तथा 6 जनवरी को राज्यव्यापी प्रतिवाद का ऐलान किया है।
सीपीआई (एम) के विधानसभा मार्ग स्थित प्रदेश कार्यालय में आयोजित संयुक्त प्रेसवार्ता में वामपंथी नेताओं ने कहा कि मिर्जापुर के लालगंज थाने में दर्ज एफआईआर संख्या 04/2026 में कॉमरेड सुधाकर यादव का नाम तक नहीं है, न ही वे कथित घटना स्थल पर मौजूद थे। इसके बावजूद उन्हें फर्जी तरीके से फंसाकर गिरफ्तार किया गया।
प्रेसवार्ता में बताया गया कि भाकपा (माले) की राज्य स्थायी समिति सदस्य व जिला सचिव कॉमरेड जीरा भारती को भी इसी मामले में शनिवार को गिरफ्तार किया गया, जबकि वे भी मौके पर मौजूद नहीं थीं और उन्हें झूठे तरीके से नामजद किया गया है। दोनों नेता बनारस में एक दिवंगत पार्टी सदस्य की अंत्येष्टि में शामिल होकर लौट रहे थे, तभी अदलहाट थाना क्षेत्र के शर्मा मोड़ मार्केट के पास उन्हें बिना वारंट और कारण बताए गिरफ्तार कर लिया गया।
वाम दलों के नेताओं ने आरोप लगाया कि गिरफ्तारियों के बाद पुलिस ने काफी देर तक यह स्पष्ट नहीं किया कि नेताओं को किस मामले में और कहां ले जाया जा रहा है। कई प्रयासों के बावजूद अधिकारियों द्वारा कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई।
नेताओं ने कहा कि कॉमरेड सुधाकर यादव और कॉमरेड जीरा भारती मिर्जापुर जिले में वनाधिकार कानून के तहत आदिवासियों के अधिकारों की बहाली, विस्थापन रोकने और बुलडोजर कार्रवाई के विरोध में चल रहे संघर्ष का नेतृत्व कर रहे हैं। हाल ही में मंडलायुक्त के समक्ष हुए प्रदर्शन के बावजूद, प्रशासन और वन विभाग द्वारा रात के अंधेरे में आदिवासी बस्ती तेंदुआ खुर्द (लालगंज) में फसलों को उजाड़ने की कोशिश की गई और विरोध करने पर ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं, के साथ दुर्व्यवहार किया गया।
वाम दलों ने आरोप लगाया कि वन विभाग की शिकायत पर एफआईआर दर्ज कर ली गई, लेकिन घायल ग्रामीणों और महिलाओं की तहरीर पर कोई मामला दर्ज नहीं किया गया। कई ग्रामीणों को भी गिरफ्तार किया गया है।
प्रेसवार्ता में वामपंथी नेताओं ने मांग की कि माले राज्य सचिव सुधाकर यादव, जिला सचिव जीरा भारती सहित सभी गिरफ्तार ग्रामीणों को तत्काल रिहा किया जाए, फर्जी मामलों में फंसाने वाले पुलिस अधिकारियों और आदिवासियों पर हमला करने वाले वनकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए तथा बुलडोजर कार्रवाई तुरंत रोकी जाए।
वाम दलों ने योगी सरकार पर दमनकारी नीति अपनाने का आरोप लगाते हुए 6 जनवरी को प्रदेशव्यापी प्रतिवाद का आह्वान किया।
प्रेसवार्ता को सीपीआई (एम) की केंद्रीय समिति सदस्य डॉ. हीरालाल यादव, सीपीआई राज्य सचिव मंडल की सदस्य कांति मिश्रा, भाकपा (माले) राज्य स्थायी समिति सदस्य रमेश सिंह सेंगर व अरुण कुमार तथा फारवर्ड ब्लॉक के उदयनाथ सिंह ने संबोधित किया।
— सब तक एक्सप्रेस

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