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‘बस तीन-चार महीने बचे हैं’, युवराज सिंह ने बताई जिंदगी के सबसे मुश्किल दिनों की दर्दनाक कहानी, सुनकर भावुक हो जाएंगे

भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार ऑलराउंडर युवराज सिंह ने कैंसर जैसी बीमारी को मात दी है। युवराज ने बताया है कि जब उन्हें अपनी बीमारी के बारे में पता चला तो उन्हें ऐसा लगा जैसा सामने मौत खड़ी है।

HighLights

  1. युवराज सिंह ने बताई कैंसर से लड़ाई की दास्तान
  2. डॉक्टर की एक बात ने बढ़ाई थी हिम्मत
  3. युवराज ने कहा कि उन्हें कैंसर के बाद दूसरी जिंदगी मिली

 भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व ऑलराउंडर युवराज सिंह ने अपने जीवन के सबसे मुश्किल दिनों को याद किया है। उन्होंने बताया है कि 2011 वर्ल्ड कप के बाद वह कैंसर से जूझ रहे थे और इस दौरान उन्होंने मौत को सामने से देखा था। महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में जीते वर्ल्ड कप के बाद युवराज सिंह को कैंसर की बीमारी के बारे में पता चला था। उनके बारे में ये खबर सुन पूरे क्रिकेट जगत में तहलका मच गया है।

युवराज वर्ल्ड कप जीत के होरी थे और वह प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट भी बने थे। युवराज ने मैदान पर कई बार हिम्मत दिखाई और भारत को जीतें दिलाई थीं और इससे कहीं ज्यादा हिम्मत उन्होंने कैंसर को मात देने में दिखाई। कैंसर को पछाड़ने के बाद वह टीम इंडिया में वापसी करने में भी सफल रहे थे।

‘तीन से छह महीने बचे हैं’

युवराज को वर्ल्ड कप के दौरान ही परेशानी हो रही थी। वह कई बार मैदान पर परेशानी में दिखे भी। एक मैच में तो वह उल्टियां कर रहे थे। लेकिन टूर्नामेंट के दौरान उन्हें कुछ पता नहीं चला। इसके बाद जब उन्होंने अपना ईलाज कराया तो उन्हें कैसर के बारे में पता चला। युवराज ने बताया कि डॉक्टरों ने उनसे कह दिया था कि उनके पास तीन से छह महीने का समय बचा है।

युवराज ने केविन पीटरसन के शो पर कहा, “जब आपसे कहा जाए कि आपके तीन से छह महीने का समय है तो आपके दिमाग में पहला ख्याल ये आता है कि आप मरने वाले हैं। ट्यूमर मेरे फेंफड़ों और दिल के बीच था। डॉक्टरों ने कहा था कि अगर मेरी कीमोथेरेपी नहीं होती है तो मुझे हार्ट अटैक आ सकता है।”

युवराज ने कहा, “मुझे टेस्ट क्रिकेट में जगह मिल रही थी। मैंन इसके लिए सात साल इंतजार किया और तकरीबन 40 मैचों में 12वां खिलाड़ी रहा। मैं खेलना चाहता था, लेकिन हमारे पास ईलाज के लिए अमेरिका जाने के अलावा कोई और चारा नहीं था।”

डॉक्टर ने दिया भरोसा

युवराज सिंह के लिए ये दौर काफी मुश्किल भरा था। वह मानसिक और शारीरिक तौर पर परेशान थे लेकिन डॉक्टर की एक बात ने उन्हें हिम्मत दी। युवराज ने बताया, “जब डॉ इनहोर्न ने मुझसे कहा कि तुम बाहर एक ऐसे इंसान के दौर पर जाओगे जिसको कभी कैंसर नहीं था। उन शब्दों ने मुझे मजबूती दी। जब मैं पूरी तरह से ठीक हो गया और मुझसे कहा गया कि मैं दोबारा क्रिकेट खेल सकता हूं तब मुझे लगा कि मुझे दूसरी जिंदगी मिल गई है।”

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