ग्राम पंचायत अशोढ़ में 25 लाख की योजना में भारी भ्रष्टाचार के आरोप, तालाब-पुल निर्माण पर उठे सवाल

रिपोर्ट – राहुल शीतलानी
ब्यूरो चीफ, उमरिया (मध्य प्रदेश)
सब तक एक्सप्रेस | उमरिया (म.प्र.)
मध्य प्रदेश सरकार द्वारा पंचायतों को कार्य एजेंसी बनाकर गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का दावा किया जाता है, लेकिन जमीनी हकीकत कई जगह इससे उलट नजर आ रही है। ऐसा ही एक मामला उमरिया जिले के मानपुर ब्लाक अंतर्गत ग्राम अशोढ़ से सामने आया है, जहां पंचायत में बैठे सरपंच, सचिव और विभागीय इंजीनियर पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, पंचायत कार्य विभाग द्वारा गांव में पानी की कमी को देखते हुए लगभग 18 लाख रुपये की लागत से एक तालाब तथा करीब 7 लाख रुपये की लागत से एक पुल निर्माण की स्वीकृति दी गई थी। लेकिन निर्माण कार्य की स्थिति देखकर ग्रामीणों में भारी रोष है।
ग्रामीणों का कहना है कि तालाब का निर्माण इस तरह किया गया है कि उसमें पानी भर पाना ही मुश्किल दिखाई देता है। तालाब की गहराई, ढलान और गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कागजों में पूरा भुगतान दिखाकर मौके पर बेहद घटिया और अधूरा काम कराया गया है।
वहीं पुल निर्माण में भी मानकों की अनदेखी करने की बात सामने आ रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि सरपंच, सचिव और संबंधित इंजीनियर ने आपसी मिलीभगत से सरकारी धन का दुरुपयोग कर अपनी जेब भरने का काम किया है।
ग्रामीणों ने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। यदि समय रहते जांच नहीं हुई तो ग्रामीण आंदोलन की चेतावनी भी दे रहे हैं।
अब देखने वाली बात यह होगी कि जिला प्रशासन और पंचायत विभाग इस गंभीर मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और भ्रष्टाचार के आरोपों पर क्या कार्रवाई करता है।




