ITI की मान्यता और संबद्धता के नियमों में कई बड़े बदलाव, सरकार के कदम से नहीं आएंगी ये बाधाएं

केंद्र सरकार ने आईटीआई की मान्यता और संबद्धता नियमों में बड़े बदलाव किए हैं। अब उद्योग समूह राज्य की एनओसी के बिना सीधे केंद्र से ‘ग्रीन चैनल’ के माध्यम से नए आईटीआई स्थापित कर सकते हैं या मौजूदा को गोद ले सकते हैं। कौशल विकास मंत्रालय ने प्रक्रिया को सरल किया है, जिससे आवेदन स्वीकृति का समय कम होगा और उद्योग की भागीदारी बढ़ेगी। इसका उद्देश्य कौशल अंतर को पाटना और अधिक युवाओं को प्रशिक्षित करना है।

उद्योगों की यह चिंता पुरानी है कि बदलती तकनीक के साथ उन्हें जिस तरह के कुशल कामगारों की आवश्यकता है, वैसे उपलब्ध नहीं हैं। इस स्किल गैप को पाटने के लिए केंद्र सरकार ने उद्योग समूहों को औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) में भागीदारी की राह तो खोली, लेकिन नियम-शर्तों की अस्पष्टता या अनावश्यक नियामक औपचारिकताएं बाधा बन रही थीं।
चूंकि, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन के साथ ”रिफॉर्म एक्सप्रेस” ने विकसित भारत-2047 की ओर गति पकड़ी है तो कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्रालय ने सुधारों को हरी झंडी देते हुए उद्योग और आईटीआई के बीच की दूरी को खत्म करने की दिशा में पहल की है। तय किया है कि नई आधुनिक आईटीआई की स्थापना या वर्तमान किसी आईटीआई को गोद लेने के लिए उद्योग समूह राज्य की एनओसी की प्रतीक्षा नहीं करेंगे, बल्कि सीधे केंद्र सरकार उन्हें फास्ट ट्रैक ”ग्रीन चैनल” से अनुमति देगी।
आखिरी बार कब जारी किए थे डीजीटी ने मानदंड?
प्रशिक्षण महानिदेशालय (डीजीटी) ने आखिरी बार 2018 में आईटीआई के लिए संबद्धता और मान्यता मानदंड जारी किए थे। पिछले सात वर्षों में इपमें कई सुधार किए गए हैं, लेकिन अब उनमें व्यापक बदलाव करते हुए नए मानदंड जारी किए गए हैं। इनमें सबसे प्रमुख यह है कि सरकार का प्रयास है कि उद्योग समूह वर्तमान तकनीकी आवश्यकता के अनुरूप कौशल प्रशिक्षण की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी करें। यह व्यवस्था पहले ही की जा चुकी है कि उद्योग समूह नई आधुनिक आईटीआई की स्थापना कर सकते हैं या वर्तमान में चल रही किसी आईटीआई को गोद लेकर वहां आवश्यकता अनुसार कौशल पाठ्यक्रम शुरू करा सकते हैं।
चूंकि, अब तक आवेदन और मान्यता की प्रक्रिया थोड़ी जटिल थी, इसलिए उद्योगों की अपेक्षित भागीदारी सुनिश्चित नहीं हो पा रही थी। कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्य निदेशालय की तीन चरणों वाले डेस्कटाप मूल्यांकन, सत्यापन आदि की औपचारिकताओं के कारण काफी विलंब होता था। एक आवेदन की स्वीकृति में एक वर्ष से अधिक का समय लग रहा था। उद्योग समूहों के अलावा अन्य सामान्य आईटीआई के लिए भी 50-60 प्रतिशत आवेदन प्रतिवर्ष लंबित रहते थे।
जयंत चौधरी ने दिए ये निर्देश
जब यह समस्या पिछले दिनों केंद्रीय कौशल विकास विकास एवं उद्यमशीलता मंत्री जयन्त चौधरी के सामने आई तो उन्होंने पीएम मोदी के रिफॉर्म एक्सप्रेस का संदेश समझाते हुए प्रशिक्षण महानिदेशालय को नए मानदंड तय करने का निर्देश दिया। उसके बाद डीजीटी ने जो नए निर्देश जारी किए, उनमें तीन चरणों के मूल्यांकन एक एक चरण में समाहित करते हुए निरीक्षण आदि की प्रक्रिया को सरल किया और इस प्रक्रिया को दो चरण का बना दिया गया है।
दावा है कि इससे सामान्य आईटीआई के आवेदन स्वीकृति का समय आधा रह जाएगा, जबकि उद्योग समूहों द्वारा स्थापित या गोद लिए जाने वाले आईटीआई को राज्यों की एनओसी की आवश्यकता नहीं होगी। उन्हें डीजीटी द्वारा ही ग्रीन चैनल से अनुमति दे दी जाएगी।
केंद्रीय मंत्री जयन्त चौधरी ने बताया कि इसके पीछे उद्देश्य है कि आईटीआई का विस्तार देश के प्रत्येक क्षेत्र में हो। अधिक से अधिक युवा कौशल प्रशिक्षित हों, ताकि भारत बड़े पैमाने पर कुशल कार्यबल तैयार कर सके।
उन्होंने बताया कि इसे देखते हुए ही आईटीआई की स्थापना के लिए भूमि आवश्यकता की शर्त को भी संशोधित कर दिया है। पहले हर भौगोलिक क्षेत्र के लिए 1.07 एकड़ न्यूनतम भूमि का नियम था, जिसे घटाकर 0.74 एकड़ कर दिया है। वहीं, पर्वतीय क्षेत्र व अन्य भौगोलक क्षेत्रों के लिए उससे भी कम का नियम बना दिया है।



