राजस्थान

शेखावाटी की ऐतिहासिक हवेलियों के संरक्षण को लेकर राजस्थान सरकार गंभीर

कानून, निजी भागीदारी और यूनेस्को की पहल

राजस्थान सरकार शेखावाटी क्षेत्र की ऐतिहासिक और कलात्मक हवेलियों के संरक्षण के लिए एक बड़े कदम की तैयारी कर रही है। इन हवेलियों को बचाने के लिए सरकार विशेष कानून लाने जा रही है, जिसे आगामी बजट सत्र में विधानसभा से पारित कराने की योजना है।

संरक्षण के लिए बनेगा नया कानून

सरकार का उद्देश्य हवेलियों के मूल स्वरूप को सुरक्षित रखते हुए उनका पुनरुद्धार करना है। इसके लिए भवन विनियमों में आवश्यक बदलाव किए जाएंगे। यह कानून विरासत भवनों के संरक्षण के लिए स्पष्ट नियम तय करेगा।

सैकड़ों वर्षों पुरानी हवेलियों का सर्वे

शेखावाटी क्षेत्र के सीकर, चूरू और झुंझुनूं जिलों में मौजूद 100 से 200 साल पुरानी 662 हवेलियों का सर्वे किया गया है। पहले चरण में 27 हवेलियों का जीर्णोद्धार किया जा चुका है।

होमस्टे और संग्रहालय की अवधारणा

कई हवेलियों को होमस्टे और संग्रहालय में बदला जा रहा है। नवलगढ़ की पोद्दार हवेली इसका प्रमुख उदाहरण है, जिसे लगभग 125 वर्ष बाद संग्रहालय का रूप दिया गया है।

उद्योगपतियों से सहयोग

उप मुख्यमंत्री दीया कुमारी ने शेखावाटी से जुड़े औद्योगिक घरानों से संरक्षण में सहयोग मांगा है। बिड़ला, पोद्दार, गोयनका, लक्ष्मी मित्तल और अनिल अग्रवाल जैसे उद्योगपतियों ने सकारात्मक रुख दिखाया है।

यूनेस्को में शामिल कराने की कोशिश

राज्य सरकार हवेलियों को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने की दिशा में भी कार्य कर रही है। इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर लगातार बैठकें हो रही हैं।

पर्यटन और संस्कृति को लाभ

सरकार का मानना है कि हवेलियों का संरक्षण विदेशी पर्यटन को बढ़ावा देगा और राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर मजबूती मिलेगी।

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