
सब तक एक्सप्रेस।
लखनऊ। प्रवासी भारतीय दिवस एवं विश्व हिंदी दिवस के पावन अवसर पर गिरमिटिया ग्लोबल काउंसिल, भारत सेवा ट्रस्ट तथा लखनऊ विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में मालवीय सभागार, लखनऊ विश्वविद्यालय में एक अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। संगोष्ठी का विषय “हिंदी का प्रवासी, प्रवासी की हिंदी” रहा।
कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता आशीष चौबे ने मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार रखते हुए कहा कि हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि प्रवासी भारतीयों की सांस्कृतिक पहचान, भावनात्मक जुड़ाव और सामाजिक एकता का सशक्त माध्यम है। उन्होंने विदेशों में रह रहे भारतीयों द्वारा हिंदी को जीवंत बनाए रखने के प्रयासों की सराहना की और इसे भावी पीढ़ियों तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया।

इस वैचारिक और महत्वपूर्ण कार्यक्रम के सफल आयोजन में कार्यक्रम संयोजक आदरणीय अरविंद पाण्डेय की भूमिका अत्यंत सराहनीय रही। वहीं बृजेश पांडेय के मार्गदर्शन एवं सहयोग से संगोष्ठी और अधिक प्रभावशाली एवं सुव्यवस्थित रूप में संपन्न हुई। आयोजकों को शिक्षाविदों, साहित्यकारों एवं प्रतिभागियों ने हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं।
संगोष्ठी में देश-विदेश से जुड़े वक्ताओं एवं शोधार्थियों ने प्रवासी समाज में हिंदी की स्थिति, उसकी चुनौतियों और संभावनाओं पर विस्तार से विचार साझा किए। यह आयोजन हिंदी के वैश्विक स्वरूप, प्रवासी जीवन में उसकी भूमिका तथा सांस्कृतिक पहचान को सशक्त करने की दिशा में एक सार्थक और प्रेरणादायक पहल साबित हुआ।
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