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लखनऊ। सुल्तानपुर जिले के दोस्तपुर ब्लॉक अंतर्गत साहिनवा गांव में मनरेगा कार्यों में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। खबर प्रकाशित होने के बाद प्रशासन हरकत में आया और मंगलवार को गांव में चल रहे कार्यों में मजदूरों की संख्या 286 से घटाकर 191 कर दी गई। बताया जा रहा है कि 5 जनवरी से लगातार 286 मजदूर कागजों में दर्शाए जा रहे थे।
ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में लंबे समय से मनरेगा के नाम पर फर्जी कार्य, कागजी हाजिरी और दिखावटी मजदूरी कराई जा रही थी। मौके पर काम बहुत कम हो रहा था, जबकि दस्तावेजों में भारी संख्या में मजदूर और बड़े कार्य दिखाए जा रहे थे। मामले के उजागर होने के बाद ब्लॉक स्तर से हस्तक्षेप किया गया, जिससे अनियमितताओं की परतें खुलने लगी हैं।
इस मामले में पंचायत सचिव अशुलिका पटेल ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए इसे “सिस्टम की गड़बड़ी” बताया है।
वहीं गांव के प्रधान सभाजीत कनौजिया ने भी खुद को अकेला दोषी मानने से इनकार करते हुए कहा कि यह पूरा मामला सिस्टम से जुड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ब्लॉक से लेकर ऊपर तक पैसे का लेन-देन होता है और केवल साहिनवा ही नहीं, बल्कि पूरे दोस्तपुर ब्लॉक में मनरेगा में भ्रष्टाचार फैला हुआ है। प्रधान के इस बयान से प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी या मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा। ग्रामीणों की मांग है कि पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि मनरेगा में चल रहे भ्रष्टाचार पर रोक लग सके।
हालांकि मजदूरों की संख्या घटाकर प्रशासन ने औपचारिक कार्रवाई कर दी है, लेकिन असली परीक्षा अब आगे की जांच और दोषियों पर होने वाली कार्रवाई को लेकर है। देखना होगा कि अधिकारी सख्त कदम उठाते हैं या फिर मामला दबा दिया जाता है।



