जिले में चोरी के एक मामले में अदालत ने आरोप पत्र दाखिल होते ही सुनवाई पूरी कर दोषियों को सजा सुना दी। इस फैसले ने न सिर्फ त्वरित न्याय की मिसाल पेश की, बल्कि प्रदेश में न्यायिक प्रक्रिया को और प्रभावी बनाने की दिशा में एक मजबूत संदेश भी दिया।
चोरी के तीन आरोपियों को चार्जशीट वाले दिन सजा सुनाई
राजस्थान में त्वरित न्याय की एक ऐतिहासिक मिसाल कायम करते हुए कोटपूतली-बहरोड़ जिले के पावटा न्यायालय ने चोरी के एक मामले में आरोप पत्र प्रस्तुत होने के दिन ही संपूर्ण ट्रायल पूरा कर तीन अभियुक्तों को तीन-तीन वर्ष के कठोर कारावास तथा प्रत्येक पर 20,000 रुपये का जुर्माना लगाया है। यह राज्य का पहला मामला माना जा रहा है, जिसमें एक ही दिन में विचारण पूर्ण कर दोषियों को सजा सुनाई गई।
न्यायिक मजिस्ट्रेट पावटा डॉ. अजय कुमार बिश्नोई ने इस प्रकरण में त्वरित सुनवाई करते हुए अभियोजन पक्ष के सभी साक्ष्यों एवं दस्तावेजों के आधार पर निर्णय सुनाया। अभियोजन अधिकारी डॉ. पंकज यादव ने बताया कि 6 जनवरी 2026 को विक्रम सिंह पुत्र उम्मेद सिंह, श्योपाल सैनी, ईश्वर सैनी एवं अंकित सिंघल ने पुलिस थाना प्रागपुरा में लिखित रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
रिपोर्ट के अनुसार 5 जनवरी की मध्यरात्रि को अज्ञात चोरों ने प्रागपुरा के नारायणपुर मोड स्थित हरिओम जनरल स्टोर, श्री श्याम मिष्ठान भंडार, एम.एस. मोबाइल सेंटर तथा मानवी हेल्थ केयर के शटरों के ताले तोड़कर दुकानों से नगदी चोरी कर ली थी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 27 जनवरी को विजयपाल पुत्र ओमप्रकाश (निवासी गंडाला), कपिल पुत्र जयसिंह (निवासी गंडाला) तथा राजेश पुत्र हरिराम (निवासी फतेहपुरा) तीनों को पुलिस थाना नीमराणा क्षेत्र से गिरफ्तार किया। इसके बाद 29 जनवरी को आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
आरोप पत्र प्रस्तुत होने के दिन ही न्यायालय ने अभियोजन पक्ष के कुल सात साक्षियों के बयान दर्ज किए तथा प्रकरण में 50 दस्तावेजों को साक्ष्य के रूप में प्रदर्शित किया। समस्त साक्ष्यों के परीक्षण के बाद न्यायालय ने तीनों अभियुक्तों को दोषी मानते हुए कठोर कारावास एवं आर्थिक दंड की सजा सुनाई।
उल्लेखनीय है कि कोटपूतली-बहरोड़ जिले के जिला एवं सत्र न्यायाधीश रवि शर्मा द्वारा चोरी, लूट एवं अन्य आपराधिक मामलों में शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित करने के लिए सभी न्यायिक अधिकारियों को निर्देश जारी किए गए हैं। इसी क्रम में इस प्रकरण में असाधारण तेजी से सुनवाई कर निर्णय किया गया।
कानूनी विशेषज्ञों एवं स्थानीय प्रशासन के अनुसार यह फैसला त्वरित न्याय प्रणाली को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो अपराधियों को सख्त संदेश देने के साथ-साथ आमजन में कानून के प्रति विश्वास को और मजबूत करेगा।