
विशेष संवाददाता: शैलेन्द्र यादव, सीतापुर:
सीतापुर। जिलाधिकारी डॉ. राजागणपति आर. ने नगर पंचायत सिधौली का औचक निरीक्षण कर विभिन्न विभागों की व्यवस्थाओं का गहनता से जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने जन्म एवं मृत्यु प्रमाण-पत्र पटल, स्टोर, जलकल, लेखा अनुभाग सहित अन्य महत्वपूर्ण पटलों की पत्रावलियों का अवलोकन किया और कई मामलों में लापरवाही पर नाराजगी जताते हुए संबंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने जन्म प्रमाण-पत्र पटल पर रजिस्टर का निरीक्षण किया, जहां मोबाइल नंबर दर्ज न होने पर असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने अधिशासी अधिकारी नगर पालिका परिषद सिधौली रेणुका यादव को शासन के निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इसके बाद मृत्यु प्रमाण-पत्र से संबंधित पत्रावलियों की जांच की गई, जिसमें जिलाधिकारी ने आवेदनकर्ता से दूरभाष पर बात कर प्रमाण-पत्र जारी होने की स्थिति की जानकारी ली।
स्टोर इंचार्ज पटल के निरीक्षण के दौरान कूड़ा उठान वाहनों से संबंधित अभिलेख, वाहनों की संख्या एवं लॉगबुक की जांच की गई। पानी की टंकी की साफ-सफाई से जुड़ी पत्रावलियों का अवलोकन करते हुए जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि सफाई के फोटोग्राफ अनिवार्य रूप से पत्रावली में संलग्न किए जाएं।
दाखिल-खारिज पटल और जलकल पटल पर निर्माणाधीन भवनों से संबंधित अभिलेखों की भी जांच की गई। लेखा अनुभाग में तालाब पट्टा एवं लैंड मैप रजिस्टर का अवलोकन किया गया। नगर पालिका द्वारा कराए गए इंटरलाकिंग सड़क निर्माण कार्य की पत्रावली देखने पर जिलाधिकारी ने पाया कि ठेकेदार को समय से भुगतान नहीं हुआ है और कार्य वर्कऑर्डर के अनुरूप पूर्ण नहीं है। इस पर अवर अभियंता आलोक सिंह को नोटिस जारी करने तथा अधिशासी अधिकारी को शीघ्र सुधार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
बन्धन योजना से संबंधित अभिलेखों का भी अवलोकन किया गया। साथ ही वार्डों में प्रकाश व्यवस्था की स्थिति की जानकारी लेते हुए जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि जहां प्रकाश व्यवस्था कमजोर है, वहां स्वयं निरीक्षण कर तत्काल सुधार कराया जाए।
निरीक्षण के दौरान नगर पालिका परिषद सिधौली के अध्यक्ष गंगाराम राजपूत सहित संबंधित अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे। निरीक्षण के पश्चात जिलाधिकारी ने वार्ड संतनगर पूर्वी में आरसीसी कवर्ड नाली एवं इंटरलाकिंग सड़क निर्माण कार्य तथा वार्ड सिद्धेश्वरनगर स्थित सिद्धेश्वर मंदिर में निर्माणाधीन हाल का स्थलीय निरीक्षण किया। कार्यों की गुणवत्ता और प्रगति की समीक्षा करते हुए उन्होंने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए।



