MCX का बड़ा झटका: गोल्ड-सिल्वर फ्यूचर्स में मार्जिन बढ़ने से ट्रेडर्स की रणनीति बदली

सोने और चांदी के फ्यूचर्स बाजार में फरवरी 2026 से एक नई सख्ती देखने को मिल रही है। MCX ने अतिरिक्त मार्जिन बढ़ाकर साफ संकेत दे दिया है कि अब कम पूंजी और ज्यादा जोखिम वाली ट्रेडिंग को हतोत्साहित किया जाएगा।
यह फैसला ऐसे समय आया है, जब वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता और उतार-चढ़ाव लगातार बढ़ रहा है।
मार्जिन बढ़ोतरी के पीछे गणित
फ्यूचर्स ट्रेडिंग में कुल मार्जिन दो हिस्सों में बंटा होता है—
-
SPAN मार्जिन
-
एक्सपोजर या अतिरिक्त मार्जिन
MCX ने इसी अतिरिक्त हिस्से को बढ़ाया है, जिससे कुल जोखिम कवर किया जा सके।
गोल्ड बनाम सिल्वर: अलग-अलग असर
डेटा पर नजर डालें तो—
-
सोने पर कुल अतिरिक्त मार्जिन 3%
-
चांदी पर कुल अतिरिक्त मार्जिन 7%
इससे साफ है कि एक्सचेंज चांदी को ज्यादा अस्थिर मान रहा है।
कैपिटल ब्लॉकिंग का प्रभाव
मार्जिन बढ़ने से ट्रेडर्स की बड़ी रकम एक्सचेंज में लॉक हो जाती है। इससे—
-
रिटर्न ऑन कैपिटल घटता है
-
पोजिशन साइज़ छोटा करना पड़ता है
यही वजह है कि कई ट्रेडर्स अब अपनी रणनीति बदल रहे हैं।
रिटेल ट्रेडर्स क्यों दबाव में हैं?
छोटे निवेशक आमतौर पर सीमित पूंजी के साथ काम करते हैं। मार्जिन बढ़ते ही—
-
उनकी खरीद क्षमता घट जाती है
-
ओपन पोजिशन स्क्वेयर ऑफ करनी पड़ सकती है
क्या वॉल्यूम घटेगा?
शुरुआती दौर में ट्रेडिंग वॉल्यूम में गिरावट संभव है, लेकिन एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इससे सट्टेबाजी कम होगी और गंभीर निवेशक ही बाजार में टिकेंगे।
एक्सचेंज के लिए क्यों जरूरी था यह कदम?
-
हाई वोलैटिलिटी
-
ग्लोबल इवेंट्स का असर
-
डिफॉल्ट रिस्क में बढ़ोतरी
इन सभी वजहों से MCX को यह फैसला लेना पड़ा।
बड़े निवेशकों की स्थिति
संस्थागत और हाई नेटवर्थ ट्रेडर्स के लिए यह फैसला ज्यादा नुकसानदेह नहीं है। उनके पास पर्याप्त पूंजी होती है और वे लंबे समय की रणनीति पर काम करते हैं।
भविष्य की तस्वीर
अगर बाजार स्थिर होता है, तो MCX आगे चलकर मार्जिन घटा भी सकता है। लेकिन फिलहाल फ्यूचर्स ट्रेडिंग में अनुशासन ही प्राथमिकता है।
निष्कर्ष
मार्जिन बढ़ोतरी ने साफ कर दिया है कि अब गोल्ड-सिल्वर फ्यूचर्स में वही टिक पाएगा, जिसकी रणनीति मजबूत और पूंजी पर्याप्त होगी।



