जापान में ताकाइची का दोबारा प्रधानमंत्री बनना तय, चुनावी दांव हुआ सफल; एग्जिट पोल में दो तिहाई बहुमत

जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री सानेए ताकाइची की सत्तारूढ़ गठबंधन सरकार ने निचले सदन के चुनाव में प्रचंड जीत हासिल की है। एग्जिट पोल के अनुसार, उनकी लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी और सहयोगी दल 465 में से 360 से अधिक सीटें जीत सकते हैं, जिससे उन्हें संसद में सुपरमेजारिटी मिलेगी।
HighLights
- ताकाइची की पार्टी ने निचले सदन में प्रचंड जीत दर्ज की।
- पीएम मोदी ने ताकाइची की दी बधाई।
- जापान की रक्षा नीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर पड़ेगा प्रभाव।
जापान की प्रधानमंत्री सानेए ताकाइची के नेतृत्व वाली सत्तारूढ़ गठबंधन सरकार निचले सदन के चुनाव में प्रचंड जीत की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है।
एग्जिट पोल के अनुसार, ताकाइची की लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) और उसकी सहयोगी जापान इनोवेशन पार्टी मिलकर 465 में से लगभग 360 से अधिक सीटें हासिल कर सकती हैं।
यह जीत उन्हें संसद में सुपरमेजारिटी दे सकती है, जिससे सरकार के लिए नीतिगत फैसले लेना और विधायी एजेंडा आगे बढ़ाना आसान हो जाएगा।
पीएम मोदी ने ताकाइची की दी बधाई
सख्त फैसलों के लिए जापान की लौह महिला कही जानेवाली ताकाइची की सफलता पर पीएम नरेन्द्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप समेत दिग्गज राजनेताओं ने उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दी हैं।
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ताकाइची को बधाई देते हुए कहा, ‘सनाए ताकाइची, प्रतिनिधि सभा के चुनावों में ऐतिहासिक जीत पर आपको हार्दिक बधाई। मुझे विश्वास है कि आपके कुशल नेतृत्व में हम भारत और जापान की मित्रता को नई ऊंचाई पर ले जाएंगे।’
अमेरिका ने चुनाव से पहले दिया समर्थन
चुनाव से पहले राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने उनको अपना पूरा समर्थन दिया था और कहा था कि वह अगले महीने ताकाइची के सम्मान में व्हाइट हाउस में भोज देंगे। अमेरिका के वाणिज्य मंत्री स्कॉट बेसेंट ने ताकाइची की प्रशंसा करते हुए कहा कि जापान मजबूत होगा तो अमेरिका की भी एशिया में मजबूत मौजूदगी रहेगी।
ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते ने सबसे पहले ताकाइची को जीत की बधाई दी। ताकाइची की जीत से चीन की चिंता बढ़ सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि चीन को अब मजबूत जापान से असली चुनौती मिलेगी।
प्रचंड जीत की ओर सानेए ताकाइची
64 वर्षीय ताकाइची, जो जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री हैं, उन्होंने पिछले वर्ष अक्टूबर में पद संभालने के बाद से ही अपनी सख्त छवि और स्पष्ट वक्तव्य शैली के कारण लोकप्रियता हासिल की है। इसी बढ़ती स्वीकार्यता को भुनाने के लिए उन्होंने दुर्लभ शीतकालीन चुनाव का दांव खेला, जो अब सफल होता दिख रहा है।
देश के कई हिस्सों में रिकॉर्ड बर्फबारी के बावजूद मतदाताओं ने लंबी कतारों में खड़े होकर मतदान किया, हालांकि कुछ मतदान केंद्रों को समय से पहले बंद भी करना पड़ा।
विश्लेषकों का मानना है कि ताकाइची की जीत से जापान की रक्षा नीति में तेजी आ सकती है, खासकर चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने के संदर्भ में। ताकाइची रक्षा बजट बढ़ाने, हथियार निर्यात पर लगे प्रतिबंधों में ढील देने और आप्रवासन नियमों को सख्त करने की पक्षधर रही हैं।
चीन-अमेरिका के साथ जापान के रिश्ते
ताकाइची की राष्ट्रवादी नीतियों और ताइवान मुद्दे पर दिए गए बयानों ने बीजिंग के साथ रिश्तों में खटास भी पैदा की है। हालांकि, अमेरिका के साथ रणनीतिक संबंधों को मजबूत करना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है।
दूसरी ओर, खाद्य पदार्थों पर आठ प्रतिशत उपभोक्ता कर निलंबित करने के उनके वादे ने वित्तीय बाजारों को अस्थिर किया है, क्योंकि जापान पहले ही विकसित देशों में सबसे अधिक कर्ज बोझ झेल रहा है।
ताकाइची के काम को लोगों ने किया पसंद
न्यूज एजेंसी एपी के अनुसार, उनकी सख्त लेकिन ऊर्जावान शैली और ‘काम, काम और काम’ का नारा युवाओं के बीच खासा लोकप्रिय हुआ है। हालांकि एलडीपी को पिछले वर्षों में फंडिंग और धार्मिक संगठनों से जुड़े विवादों का सामना करना पड़ा था, जिसे ताकाइची इस चुनाव के जरिए पीछे छोड़ना चाहती थीं।
आलोचकों का कहना है कि ताकाइची की नीतियों से नागरिक अधिकारों पर असर पड़ सकता है और क्षेत्रीय कूटनीति जटिल हो सकती है।ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरी केंद्रों तक, मतदाताओं की राय मिश्रित रही।
बुजुर्ग वर्ग जहां आर्थिक बोझ बढ़ने की आशंका जता रहा है, वहीं युवा मतदाताओं का बड़ा तबका ताकाइची के समर्थन में खुलकर सामने आया है।
इंटरनेट मीडिया पर ‘सानाकात्सु’ नामक ट्रेंड, जो उनके अंदाज और निजी सामानों की लोकप्रियता से जुड़ा है, ने भी उनकी छवि को नई पीढ़ी के बीच और मजबूत किया है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस चुनाव परिणाम पर नजरें टिकी हैं, क्योंकि इससे एशिया-प्रशांत क्षेत्र की रणनीतिक राजनीति पर दूरगामी प्रभाव पड़ सकता है।
(समाचार एजेंसी रॉयटर्स के इनपुट के साथ)



