बीजेपी में भीतरघात या आपसी टकराव? अंता उपचुनाव ने खोली पोल

हार के बाद बढ़ता तनाव
अंता विधानसभा उपचुनाव के नतीजों ने बीजेपी की रणनीति से ज्यादा उसके संगठन की स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हार के बाद पार्टी के भीतर तनाव साफ नजर आने लगा है।
पत्र ने बढ़ाया विवाद
मोरपाल सुमन द्वारा लिखा गया पत्र जब सार्वजनिक हुआ, तो संगठन में खलबली मच गई। पत्र में उन्होंने पार्टी के नेताओं पर चुनाव में साथ न देने का आरोप लगाया।
अनुशासन बनाम असंतोष
पार्टी नेतृत्व ने इसे अनुशासनहीनता माना और सुमन को नोटिस जारी किया। वहीं सुमन ने खुद को निर्दोष बताते हुए पत्र लीक होने की जिम्मेदारी दूसरों पर डाली।
जांच का दायरा
प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने मामले की जांच के आदेश दिए। विधायकों से पूछताछ हुई, लेकिन किसी ठोस निष्कर्ष पर अभी नहीं पहुंचा जा सका है।
नेतृत्व की चुनौती
अब सवाल यह है कि पार्टी नेतृत्व इस विवाद को कैसे संभालता है। अगर समय रहते समाधान नहीं निकला, तो यह असंतोष और गहरा सकता है।
आरोपों की गंभीरता
पत्र में एक कैबिनेट मंत्री और राष्ट्रीय स्तर के नेताओं की टीम पर भी आरोप लगना मामले को और संवेदनशील बना देता है।
संगठन की परीक्षा
अंता उपचुनाव बीजेपी के लिए संगठनात्मक परीक्षा बन गया है, जिसमें नेतृत्व की भूमिका अहम होगी।



