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सैल्सफोर्स के कर्मचारियों ने CEO मार्क बेनिओफ़ से आईसीई (इमीग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट) के साथ किए गए “अवसरों” को रद्द करने की अपील की है। कर्मचारियों का कहना है कि कंपनी को उन अनुबंधों और संबंधों को समाप्त करना चाहिए जो मानवाधिकारों के उल्लंघन से जुड़े हैं। यह मांग ऐसे समय में उठाई गई है जब कई कंपनियों पर यह दबाव बढ़ता जा रहा है कि वे अपने व्यवसायिक संबंधों की नैतिकता पर विचार करें। कर्मचारियों ने बताया कि वे चाहते हैं कि सैल्सफोर्स एक जिम्मेदार कंपनी के रूप में कार्य करे और अपने मूल्यों के अनुसार निर्णय ले।

### उपनगरों में बढ़ती बाढ़ से प्रभावित लोग: राहत और पुनर्वास की चुनौती

हाल ही में हुई भारी बारिश ने राजधानी के उपनगरों में बाढ़ की स्थिति को जन्म दिया है, जिससे हजारों लोग प्रभावित हुए हैं। स्थानीय प्रशासन ने राहत कार्य शुरू कर दिए हैं, लेकिन प्रभावितों के लिए राहत और पुनर्वास की चुनौती अब भी बनी हुई है।

बाढ़ के कारण, कई क्षेत्रों में घरों में पानी भर गया है, जिससे लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। विशेष रूप से, झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले परिवारों को सबसे अधिक नुकसान हुआ है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस बार की बारिश ने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। पानी में डूबे घरों के साथ ही, आवश्यक वस्तुओं की कमी भी महसूस की जा रही है।

स्थानीय प्रशासन ने राहत सामग्री जैसे भोजन, पानी और दवाइयों का वितरण शुरू किया है। हालांकि, कई स्थानों पर राहत पहुंचाने में देरी हो रही है, जिससे लोगों के बीच चिंता बढ़ रही है। एक स्थानीय निवासी ने बताया, “हमारे पास खाने के लिए कुछ नहीं है। हम बचाव कार्य की प्रतीक्षा कर रहे हैं, लेकिन हमें तुरंत मदद की आवश्यकता है।”

बाढ़ से प्रभावित क्षेत्र का दौरा करते हुए, अधिकारियों ने राहत कार्यों की गति को तेज करने का आश्वासन दिया है। साथ ही, पुनर्वास के लिए स्थायी उपायों पर विचार करने की बात भी कही गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मौसम के उतार-चढ़ाव को देखते हुए, शहर को बेहतर बुनियादी ढांचे की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति से बचा जा सके।

इस बाढ़ ने न केवल जीवन और संपत्ति को नुकसान पहुंचाया है, बल्कि यह मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर डाल रही है। कई लोग इस त्रासदी के कारण मानसिक तनाव और चिंता का सामना कर रहे हैं। समाजसेवी संस्थाएं इस दिशा में भी कदम उठा रही हैं, ताकि प्रभावित लोगों को मानसिक सहायता मिल सके।

स्थानीय समुदाय ने भी एकजुटता दिखाई है। कई स्वयंसेवी संगठन और स्थानीय लोग राहत कार्यों में शामिल हो रहे हैं, ताकि प्रभावितों की मदद की जा सके। यह एक सकारात्मक संकेत है कि संकट के समय में लोग एक-दूसरे के साथ खड़े होते हैं।

इस प्राकृतिक आपदा ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया है कि हमें जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को गंभीरता से लेना होगा। अगर हम इस दिशा में समय रहते कदम नहीं उठाएंगे, तो भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति होना निश्चित है। स्थानीय प्रशासन और सरकार को इस दिशा में ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि आने वाले समय में ऐसी आपदाओं से निपटने के लिए हम पूरी तरह से तैयार रहें।

बाढ़ के बाद की इस स्थिति में राहत और पुनर्वास की चुनौतियों को हल करना हर किसी की जिम्मेदारी है, ताकि प्रभावित लोग जल्द से जल्द अपने पैरों पर खड़े हो सकें।

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