चार सालों से चल रहे यूक्रेन युद्ध के बाद, क्या यूरोप अपनी खुद की सेना के लिए तैयार है? यूक्रेन में चल रहे संघर्ष ने यूरोप के सुरक्षा परिदृश्य को बदल दिया है और इसने यूरोप में सैन्य आत्मनिर्भरता की आवश्यकता को उजागर किया है। कई यूरोपीय देश अब इस बात पर विचार कर रहे हैं कि क्या उन्हें एक संयुक्त यूरोपीय सेना की आवश्यकता है, ताकि वे भविष्य की चुनौतियों का सामना कर सकें। इस विषय पर विभिन्न दृष्टिकोण हैं। कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि एक संयुक्त यूरोपीय सेना यूरोप की सुरक्षा को मजबूत कर सकती है और NATO पर निर्भरता को कम कर सकती है। वहीं, अन्य लोग इस विचार के प्रति सतर्क हैं, यह मानते हुए कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे अधिकतर देशों के लिए प्राथमिकता होनी चाहिए। यूरोप के कई देशों ने अपनी रक्षा बजट बढ़ाने की योजना बनाई है और सैन्य सहयोग को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न पहल की हैं। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यूरोप अपनी खुद की सेना बनाने के लिए सामूहिक रूप से कदम उठाएगा या फिर यह केवल एक चर्चा बनी रहेगी। इस प्रकार, यूक्रेन युद्ध ने एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा कर दिया है: क्या यूरोप अपनी सुरक्षा के लिए एक सशक्त और स्वतंत्र सैन्य बल के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ने के लिए तैयार है?

### दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण की समस्या: नागरिकों की चिंता बढ़ी
दिल्ली की हवा में प्रदूषण का स्तर एक बार फिर चिंताजनक स्थिति में पहुंच गया है, जिससे आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है। हाल के अध्ययनों के अनुसार, इस वर्ष अक्टूबर में दिल्ली के कई क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) ने खतरनाक स्तर को पार कर लिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्थिति के पीछे कई कारण हैं, जिनमें निर्माण कार्य, वाहनों की बढ़ती संख्या और पराली जलाने की समस्या शामिल हैं।
स्थानीय निवासियों ने बताया कि सुबह-सुबह बाहर निकलना एक चुनौती बन गया है। कई लोग मास्क पहनने को मजबूर हैं, जबकि कुछ लोग स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रहे हैं। एक स्थानीय निवासी, जिनका नाम राजेश है, ने कहा, “हमारी सेहत पर इसका बुरा असर पड़ रहा है। बच्चों को बाहर खेलने नहीं भेज पा रहे हैं। यह बेहद चिंताजनक है।”
वहीं, पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि स्थिति को सुधारने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। एक पर्यावरणविद्, डॉ. सुमिता ने कहा, “हमें केवल प्रदूषण के स्रोतों को पहचानने की जरूरत नहीं है, बल्कि उन्हें नियंत्रित करने के लिए ठोस नीतियां भी बनानी होंगी।”
दिल्ली सरकार ने इस समस्या के समाधान के लिए कुछ उपायों की घोषणा की है, जिसमें निर्माण स्थलों पर प्रदूषण नियंत्रित करने के लिए सख्त नियम और पराली जलाने के खिलाफ जागरूकता अभियान शामिल हैं। हालांकि, नागरिकों का मानना है कि इन उपायों का प्रभावी क्रियान्वयन जरूरी है।
इसी बीच, मौसम विभाग ने आगामी दिनों में मौसम में बदलाव का संकेत दिया है, जिससे प्रदूषण के स्तर में कुछ कमी आने की संभावना है। लेकिन क्या यह समाधान स्थायी होगा? यह सवाल अब भी अनुत्तरित है।
एक बात स्पष्ट है, अगर दिल्ली को अपनी हवा को साफ करना है, तो नागरिकों, सरकार और उद्योगों को मिलकर काम करना होगा। यह न केवल स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक स्वस्थ वातावरण सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।



