छत्तीसगढ़: आस्था और संस्कृति का संगम, कोंडागांव का 700 साल पुराना ऐतिहासिक मेला शुरू

कोंडागांव जिले का ऐतिहासिक और पारंपरिक मेला पूरे श्रद्धा, उत्साह और सांस्कृतिक गरिमा के साथ शुरू हो गया है। लगभग 700 वर्षों से चली आ रही यह गौरवशाली परंपरा आज भी क्षेत्रवासियों की आस्था, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता का प्रतीक बनी हुई है। बुजुर्गों से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस मेले का इतिहास करीब सात शताब्दियों पुराना है, जो इसे विशेष महत्व प्रदान करता है।
मेले की शुरुआत देवी-देवताओं की पावन परिक्रमा से हुई। पारंपरिक वाद्ययंत्रों और जनजातीय रीति-रिवाजों के साथ देवी-देवताओं को मेला परिसर में भ्रमण कराया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और पूरा वातावरण भक्ति एवं उल्लास से सराबोर हो उठा।
इस आयोजन की सबसे खास बात 24 परगना से देवी-देवताओं का समागम है, जो क्षेत्रीय एकता, भाईचारे और सामाजिक समरसता का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करता है। विभिन्न गांवों और अंचलों से आए श्रद्धालु अपने-अपने देवी-देवताओं के साथ मेले में शामिल होते हैं, जिससे यह आयोजन एक विशाल सांस्कृतिक संगम का रूप ले लेता है।
छह दिवसीय इस मेले में बुधवार की रात जिले के विभिन्न अंचलों से आए आदिवासी लोक नर्तक दलों की प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। यह प्रतियोगिता क्षेत्र की समृद्ध लोकसंस्कृति, पारंपरिक नृत्य-गीत और जनजातीय कला की जीवंत झलक प्रस्तुत करेगी।
आगामी रविवार, 1 मार्च को मेले का समापन होगा। यह मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि परंपराओं, सांस्कृतिक पहचान और सामुदायिक एकजुटता को सहेजने का एक महाउत्सव है, जो कोंडागांव की ऐतिहासिक विरासत को जीवंत बनाए रखे हुए है।



