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**किसान आंदोलन में नया मोड़: प्रदर्शनकारी भाकियू ने किया अनिश्चितकालीन धरना शुरू**

देशभर में कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसानों के आंदोलन ने एक नया मोड़ ले लिया है। भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) ने आज अनिश्चितकालीन धरने की घोषणा की है, जिसके तहत उत्तर प्रदेश के मेरठ जनपद में हजारों किसान एकत्रित हुए हैं। यह धरना सरकार की नीतियों के खिलाफ उठाई गई आवाज को और मजबूती देने के लिए आयोजित किया गया है।

धरने की शुरुआत के मौके पर भाकियू के नेता ने कहा कि किसानों की समस्याओं का समाधान न होने तक यह आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार की ओर से बार-बार किए गए आश्वासनों के बावजूद किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं हो पाया है। बैठक में भाग लेने आए किसानों ने एकजुटता दिखाते हुए अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने का संकल्प लिया।

समर्थन में जुटे जनसामान्य ने भी धरने में भाग लिया, जिससे यह स्पष्ट है कि किसान आंदोलन अब केवल कृषि कानूनों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह व्यापक सामाजिक और आर्थिक मुद्दों का प्रतिनिधित्व कर रहा है। किसानों ने अपने साथ तख्तियां और बैनर लेकर आए थे, जिन पर विभिन्न नारे लिखे हुए थे, जैसे “हमारी मांगें पूरी करो” और “किसान विरोधी कानून वापस लो।”

इस धरने का आयोजन ऐसे समय में हुआ है जब सरकार और किसान संगठनों के बीच बातचीत की कोशिशें ठप हो गई हैं। पिछले कुछ महीनों में हुई वार्ताओं का कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकल पाया, जिससे किसानों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। भाकियू के नेताओं ने यह भी कहा कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो आगामी दिनों में और भी कठोर कदम उठाए जा सकते हैं।

धरने के कारण स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से निपटा जा सके। किसानों ने प्रशासन को आश्वस्त किया है कि उनका धरना शांतिपूर्ण रहेगा और वे किसी प्रकार की हिंसा का सहारा नहीं लेंगे।

किसान आंदोलन की इस नई लहर ने एक बार फिर से यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सरकार किसानों की समस्याओं को सुनने के लिए तैयार है, या फिर यह आंदोलन एक लंबी लड़ाई में बदल जाएगा। अगले कुछ दिनों में इस धरने की प्रगति पर सभी की निगाहें रहेंगी।

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