टेक उद्योग समूह ने पीट हेगसेथ के प्रति ‘चिंता’ व्यक्त की है, जो सप्लाई चेन जोखिम लेबल को लेकर है। इस विषय पर समूह ने अपने विचार साझा किए हैं कि कैसे यह लेबल उद्योग के विकास और स्थिरता पर प्रभाव डाल सकता है। समूह के सदस्यों का मानना है कि सप्लाई चेन में उत्पन्न होने वाले जोखिमों को सही तरीके से समझना और प्रबंधित करना आवश्यक है, ताकि तकनीकी नवाचार और विकास में कोई रुकावट न आए।

### ओडिशा के भद्रक में बाढ़ से तबाही, प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य जारी
उड़ीसा के भद्रक जिले में हाल ही में आई बाढ़ ने स्थानीय निवासियों के जीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। भारी बारिश के चलते नदी के जलस्तर में अचानक वृद्धि हुई, जिससे निचले इलाकों में पानी भर गया। इस प्राकृतिक आपदा ने हजारों लोगों को प्रभावित किया है, और प्रशासन द्वारा राहत कार्य तेजी से चलाए जा रहे हैं।
स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, बाढ़ से प्रभावित क्षेत्र में लगभग 10,000 लोग विस्थापित हुए हैं। अनेक गांवों में जल स्तर इतना बढ़ गया कि घरों में पानी घुस गया और फसलें बर्बाद हो गईं। इस स्थिति से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने राहत शिविर स्थापित किए हैं, जहां प्रभावित लोगों को खाद्य सामग्री और अन्य आवश्यक वस्त्र मुहैया कराए जा रहे हैं।
स्थानीय निवासी रामकृष्ण सahoo ने बताया, “हमने कभी नहीं सोचा था कि हमारी बस्ती इतनी जल्दी डूब जाएगी। हम सभी ने मिलकर अपनी जान बचाई, लेकिन अब हमारे घर और फसलें बर्बाद हो गई हैं।” वहीं, एक अन्य प्रभावित महिला, सुमित्रा देवी ने कहा, “हमारे पास अब खाने के लिए कुछ नहीं है। राहत शिविर में आकर थोड़ी राहत मिली है, लेकिन हम अपने घर लौटने के लिए चिंतित हैं।”
राज्य सरकार ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करते हुए राहत कार्यों की समीक्षा की है। मुख्यमंत्री ने प्रभावित लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे ताकि लोगों को जल्द से जल्द राहत मिल सके। इसके साथ ही, उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि किसी भी प्रकार की कमी न होने पाए।
भद्रक जिले के अलावा, आसपास के कई अन्य जिलों में भी बाढ़ के कारण स्थिति गंभीर बनी हुई है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में और बारिश की संभावना जताई है, जिसके चलते प्रशासन और अधिक सतर्कता बरत रहा है। स्थानीय निवासियों ने भी सुरक्षा के उपायों को अपनाना शुरू कर दिया है, ताकि भविष्य में ऐसी स्थितियों से बचा जा सके।
इस संकट के बीच, स्थानीय समाजसेवी संगठनों ने भी राहत कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है। वे प्रभावित लोगों के लिए भोजन और पानी उपलब्ध कराने के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाओं की भी व्यवस्था कर रहे हैं।
भद्रक में बाढ़ के कारण उत्पन्न स्थिति ने एक बार फिर से प्राकृतिक आपदाओं की चुनौतियों को उजागर किया है। प्रशासन और स्थानीय समुदाय के प्रयासों के साथ, उम्मीद की जा रही है कि इस संकट का समाधान जल्द ही निकाला जाएगा, और प्रभावित लोग अपनी सामान्य ज़िंदगी में लौट सकेंगे।



