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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का संदेश जारी, ‘गो-मतदाता’ बनने का आह्वान

साढ़े तीन साल के कार्यों का लेखा-जोखा, गोरक्षा को लेकर ‘गविष्ठि वर्ष’ की घोषणा

वाराणसी, 19 मार्च | सब तक एक्सप्रेस
ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ‘1008’ ने नव संवत्सर ‘रौद्र’ के अवसर पर अपना वार्षिक संदेश जारी किया। इसमें उन्होंने पिछले साढ़े तीन वर्षों के कार्यों का विवरण देते हुए धर्म, राजनीति और वैश्विक मुद्दों पर अपनी बात रखी।
उन्होंने बताया कि 12 सितंबर 2022 से 19 मार्च 2026 तक करीब 1284 दिनों का समय धर्म और समाज के कार्यों में लगाया गया। इस दौरान कई बड़े प्रकल्प शुरू किए गए, जिनमें काशी के पास वैदिक और आधुनिक शिक्षा के लिए बड़े गुरुकुल का निर्माण, छत्तीसगढ़ में सवा लाख शिवलिंग मंदिर और देशभर में धर्म-जागरण यात्राएं शामिल हैं।
शंकराचार्य ने राजनीति पर भी टिप्पणी करते हुए लोगों से ‘गो-मतदाता’ बनने की अपील की। उन्होंने कहा कि समाज को ऐसे लोगों को ही समर्थन देना चाहिए, जो गौ-माता को ‘राष्ट्रमाता’ का दर्जा देने और गोवंश की रक्षा के लिए काम करें।
वैश्विक मुद्दों पर उन्होंने कहा कि किसी भी देश की संप्रभुता का उल्लंघन गलत है और सभी देशों को शांति बनाए रखनी चाहिए।
इसके साथ ही उन्होंने आने वाले वर्ष को ‘गविष्ठि वर्ष’ घोषित करते हुए उत्तर प्रदेश में 81 दिवसीय यात्रा और गोरक्षा से जुड़े अभियान चलाने की बात कही।
अंत में उन्होंने सभी लोगों को नव संवत्सर की शुभकामनाएं दीं।

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