अंतरराष्ट्रीय

खाड़ी में अब तक 3000 से ज्यादा मिसाइलें दाग चुका है ईरान, सुन्नी बहुल GCC देशों में भारी आक्रोश

ईरान ने खाड़ी देशों पर 3000 से अधिक मिसाइलें दागी हैं, जिससे मध्य पूर्व में शिया-सुन्नी संघर्ष गहरा गया है। इस कार्रवाई ने भू-राजनीतिक समीकरण बदल दिए हैं और वैश्विक तेल अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है।

HighLights

  1. ईरान ने खाड़ी देशों पर 3000 से अधिक मिसाइलें दागीं
  2. शिया-सुन्नी संघर्ष गहराया, वैश्विक तेल अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई
  3. हिंद महासागर में अमेरिकी अड्डे पर भी हमला, GCC देश आक्रोशित

 मिडिल ईस्ट में जारी जंग आज चौथे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है। लेकिन अभी भी अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच सीजफायर की कोई संभावना नहीं दिख रही है। अमेरिका और इजरायल पर कार्रवाई के साथ अब तक इस जंग में ईरान ने खाड़ी सहयोग देशों (GCC) पर 3000 से अधिक मिसाइलें दागी हैं।

ईरान द्वारा खाड़ी देशों पर किए मिसाइलें दागकर भू-राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है। जिसने मिडिल ईस्ट में शिया-सुन्नी संघर्ष को और गहरा कर दिया है।

दरअसल, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब जैसे सुन्नी बहुल 6 देशों को निशाना बनाकर ईरान ने उम्माह की एकता के दावे को खारिज कर दिया है। खाड़ी देशों पर 300 से अधिक मिसाइलें दागकर ईरान ने न केवल शिया-सुन्नी विभाजन को चरम पर पहुंचा दिया है, बल्कि होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी कर वैश्विक तेल अर्थव्यवस्था की कमर भी तोड़ दी है।

लंबी दूरी की मिसाइलें दागनी शुरू किया ईरान

वहीं, अब ईरान लंबी दूरी की मिसाइलें भी दागनी शुरू कर दिया है। शनिवार को ईरान ने 4,000 किलोमीटर दूर स्थित हिंद महासागर के डिएगो गार्सिया स्थित अमेरिकी अड्डे को निशाना बनाया। इससे अब यह संकेत मिलता है कि ईरान भविष्य में यूरोपीय देशों को निशाना बना सकता है।

ईरान द्वारा खाड़ी देशों पर किए गए हमले के बाद जीसीसी देश गुस्से से उबल रहे हैं, क्योंकि ईरानी आक्रमण से उनकी तेल अर्थव्यवस्थाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। ऐसे में ये खाड़ी देश ईरान के खिलाफ बड़ी जवाबी कार्रवाई कर सकते हैं।

अगला हमला किससे कर सकता है ईरान

अमेरिका और इजरायल के खिलाफ ईरान लगातार ड्रोन और मिसाइलों से हमले कर रहा है। इसलिए अब यह कहना भी मुश्किल नहीं है कि ईरान अगले हमले में मल्टीपल इंडिपेंडेंट रीएंट्री व्हीकल्स (एमआईआरवी) वॉरहेड्स का प्रयोग कर सकता है। एमआईआरवी मिसाइलों का मुकाबला करना बहुत मुश्किल है क्योंकि सभी छोटे वॉरहेड्स एक साथ छोड़े जाते हैं और इसे एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम से भी नहीं रोका जा सकता।

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