ट्रम्प ने ईरान की ऊर्जा सुविधाओं पर हमले की रोक को 6 अप्रैल तक बढ़ा दिया है।

### असम में बाढ़ ने जनजीवन को प्रभावित किया: राहत कार्य जारी
असम के विभिन्न हिस्सों में बाढ़ ने हाल के दिनों में जनजीवन को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। राज्य के कई जिलों में भारी बारिश के बाद नदियों के जलस्तर में अचानक वृद्धि हुई, जिसके परिणामस्वरूप बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हुई। स्थानीय प्रशासन और बचाव विभाग ने राहत कार्यों में तेजी लाई है, लेकिन प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति अभी भी चिंताजनक बनी हुई है।
असम में बाढ़ के कारण कई गांव जलमग्न हो गए हैं, जिससे हजारों लोग बेघर हो गए हैं। विशेष रूप से, गोलाघाट, डिब्रूगढ़ और कछार जैसे जिलों में स्थिति अधिक गंभीर है। स्थानीय निवासियों ने बताया कि बाढ़ के पानी ने उनके घरों में प्रवेश कर लिया है, जिससे उन्हें सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करना पड़ा है। कई परिवारों ने अपने सामान को छोड़कर ऊंचे स्थलों की ओर रुख किया है।
सरकार ने राहत कार्यों के लिए आवश्यक सामग्री और चिकित्सा सहायता प्रदान करने के लिए विशेष टीमों का गठन किया है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में खाने-पीने का सामान, दवाइयाँ और अन्य आवश्यक वस्तुएं भेजी जा रही हैं। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें भी बचाव कार्यों में जुटी हुई हैं। स्कूलों और अन्य सार्वजनिक स्थलों को अस्थायी राहत केंद्रों में तब्दील किया गया है, जहां बाढ़ से प्रभावित लोगों को अस्थायी आश्रय मिल रहा है।
बाढ़ के कारण कई सड़कों और पुलों को नुकसान पहुंचा है, जिससे राहत कार्यों में बाधा उत्पन्न हो रही है। प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए लगातार निगरानी रखी है और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की कोशिश कर रहा है। हालाँकि, मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में और बारिश की संभावना जताई है, जिससे चिंता और बढ़ गई है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्हें सरकार की मदद की उम्मीद है लेकिन वे खुद से भी एकजुट होकर इस संकट का सामना करने का प्रयास कर रहे हैं। इस बाढ़ ने न केवल भौतिक नुकसान पहुँचाया है, बल्कि लोगों की मानसिक स्थिति पर भी गहरा असर डाला है।
असम में बाढ़ की स्थिति जैसे-जैसे विकसित हो रही है, स्थानीय प्रशासन और नागरिक समाज दोनों ही राहत और बचाव कार्यों में जुटे हुए हैं। उम्मीद है कि सभी मिलकर इस कठिन समय को पार करेंगे और एक बार फिर अपनी ज़िंदगी को सामान्य दिशा में ले जाएंगे।



