नारनौल में अवैध खनन घोटाले का भंडाफोड़: विजिलेंस टीम ने माइनिंग विभाग के क्लर्क को किया गिरफ्तार, कुल 16 मामले हुए उजागर
नारनौल, हरियाणा। अवैध खनन को लेकर लंबे समय से चर्चा में रहे नारनौल जिले में विजिलेंस विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए माइनिंग विभाग के क्लर्क चंद्रशेखर को गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी जिले में चल रहे बहुचर्चित अवैध खनन घोटाले के जांच के सिलसिले में की गई है। अब तक कुल 16 आरोपी इस मामले में गिरफ्तार हो चुके हैं।
जानकारी के अनुसार, विजिलेंस टीम ने खनन विभाग में पदस्थ चंद्रशेखर पर आरोप लगाया है कि उसने अवैध खनन की गतिविधियों में जुड़े तत्वों को संरक्षण दिया और दस्तावेजों में गड़बड़ी कर मामले को छुपाने का प्रयास किया। इससे पूर्व उठाए गए कदमों में अन्य कर्मचारियों और स्थानीय गुमशुदा तत्वों के खिलाफ भी कार्रवाइयां हुई थीं।
विजिलेंस अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई भ्रष्टाचार और अवैध खनन के खिलाफ उनकी शपथबद्ध जंग का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार को रोकने के लिए सभी स्तरों पर कड़ी नजर रखी जा रही है और हर हाल में दोषियों को न्याय के कठघरे में लाया जाएगा।
स्थानीय प्रशासन भी इस मामले को गम्भीरता से ले रहा है। जिला उपायुक्त ने कहा है कि अवैध खनन की गतिविधियों पर रोकथाम के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे और विभागीय जांच के परिणाम के आधार पर पुनः कठोर कदम उठाए जाएंगे।
खनन क्षेत्र की सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए यह आवश्यक है कि ऐसे मामलों पर कड़ी निगरानी रहे। अवैध खनन से न केवल सरकारी खजाने को नुकसान होता है, बल्कि प्राकृतिक संसाधनों का भी भारी क्षति पहुंचती है।
नारनौल में हुई इस गिरफ्तारी से यह साफ संकेत मिलता है कि शासन-प्रशासन अवैध गतिविधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति पर काम कर रहा है। जनता को भी इस दिशा में सजग रहकर प्रशासन के सहयोग की आवश्यकता है, ताकि जिले में काला कारोबार समाप्त किया जा सके।
अवैध खनन रोकने के लिए विजिलेंस ने यह कार्रवाई एक प्रेरक कदम माना जा रहा है, जो आने वाले समय में भ्रष्टाचार और गड़बड़ी को रोकने में मददगार साबित होगी। पुलिस और विजिलेंस की संयुक्त कार्रवाई निरंतर जारी है और इस मामले की विस्तृत जांच चल रही है।
ध्यान देने वाली बात यह है कि अवैध खनन घोटाले में जुड़े सभी आरोपी कानून के तहत सख्त दंड का सामना करेंगे। इससे क्षेत्र में कानून व्यवस्था मजबूत होगी और स्वच्छ प्रशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया जाएगा।


