पेटेंटेड दवा दरें: GTRI के अनुसार भारत लगभग सुरक्षित

वॉशिंगटन, यूएस
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें कुछ पेटेंटेड दवाओं और संबंधित फार्मास्यूटिकल सामग्री के आयात पर 100 प्रतिशत की एड वेलोरम (ad valorem) शुल्क लगाया गया है। इस निर्णय का उद्देश्य घरेलू दवा उद्योग को बढ़ावा देना और विदेशी दवा उत्पादों की आयात सीमा को नियंत्रित करना बताया जा रहा है।
इस घोषणा के बाद से वैश्विक फार्मास्यूटिकल मार्केट में हलचल मची हुई है, जबकि भारत की फार्मा इंडस्ट्री को इस कदम से कैसे प्रभावित किया जाएगा, इस पर विभिन्न विशेषज्ञ अपनी राय दे रहे हैं। GTRI (Global Trade Research Institute) का मानना है कि भारत इस नए शुल्क लगाने की स्थिति में पूरी तरह से नहीं आएगा और इससे भारत की दवाओं की निर्यात क्षमता पर ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के पास घरेलू दवा उत्पादन की मजबूत क्षमता है और उसका निर्यात केवल कुछ विशेष पेटेंटेड दवाओं पर निर्भर करता है। इसलिए, इस तरह के शुल्क लगाने से भारत की दवा निर्यात में कोई बड़ा व्यवधान नहीं आएगा। पत्रकारों से बातचीत में, GTRI के एक वरिष्ठ विश्लेषक ने यह भी बताया कि भारत सरकार ने पहले ही अपने हितों की रक्षा के लिए कई द्विपक्षीय समझौते और रणनीतियाँ बनाई हैं, जो फार्मास्यूटिकल सेक्टर को अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मजबूत बनाएंगी।
हालांकि, अमेरिकी दवा कंपनियों का कहना है कि यह 100 प्रतिशत शुल्क उनके व्यापार को प्रभावित करेगा और संभवत: दवा की कीमतों में बढ़ोतरी का कारण बनेगा। वहीं, उपभोक्ता संगठनों का कहना है कि इस फैसले से दवाओं की उपलब्धता और उनकी कीमतों पर निगरानी रखना आवश्यक हो जाएगा ताकि आम लोग इससे प्रभावित न हों।
फार्मास्यूटिकल इंडस्ट्री के अनुसार, यह कदम वैश्विक स्तर पर दवा व्यापार की रणनीति को बदल सकता है और कई देशों के बीच ट्रेड वॉर की स्थिति को जन्म दे सकता है। भारत जैसे बड़े निर्यातक देशों को अपने उद्योग को और अधिक सक्षम बनाने के लिए नवीन तकनीकों और अनुसंधान में निवेश को बढ़ाना होगा।
अंत में, यह कहा जा सकता है कि अमेरिकी सरकार का यह नया शुल्क लगाने का फैसला एक व्यापक वैश्विक व्यापार नीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य घरेलू उद्योगों को संरक्षित करना है। भारत इस नीति के प्रभावों को समझते हुए आगे अपनी रणनीति में आवश्यक बदलाव कर सकता है ताकि दवा निर्यात के क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत बनाए रख सके।



