जयशंकर ने राहुल गांधी की ‘चीन-पाकिस्तान को साथ लाने’ वाली टिप्पणी पर कड़ी निंदा की
नई दिल्ली, भारत
लोकसभा में कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा मोदी सरकार पर चीन और पाकिस्तान को साथ लाने का आरोप लगाने के बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इसे कड़ा आरोप और देशहित के खिलाफ बयान बताया है। राहुल गांधी ने संसद में कहा कि वर्तमान सरकार की नीतियों के कारण चीन और पाकिस्तान के बीच सहयोग बढ़ा है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चिंताजनक है।
इस आरोप पर प्रतिक्रिया देते हुए जयशंकर ने कहा कि यह बिल्कुल बेबुनियाद और राजनीतिक हितों के लिए तुले हुए बयान हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की विदेश नीति सदैव देश की सुरक्षा और संप्रभुता पर केंद्रित रही है। भारत ने न केवल अपने पड़ोसी देशों के साथ शांतिपूर्ण संबंध बनाए रखने की कोशिश की है, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता के लिए भी निरंतर प्रयासरत है।
विदेश मंत्री ने कहा, “चीन और पाकिस्तान के बीच सहयोग भारत के हितों के खिलाफ है, इसलिए भारत हमेशा इस तरह के गठजोड़ से सावधान रहा है। मोदी सरकार ने अपने कार्यकाल में सीमा सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ बिल्कुल स्पष्ट और सख्त कदम उठाए हैं।” उन्होंने राहुल गांधी के इस बयान को राजनीतिक ड्रामा करार दिया और कहा कि यह देश की सुरक्षा के मुद्दे पर ध्यान भटकाने की कोशिश है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मत है कि राहुल गांधी की यह टिप्पणी आगामी चुनावों के मद्देनजर भाजपा और मोदी सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति हो सकती है। वहीं, भाजपा समर्थकों और संघ समर्थक संगठनों ने जयशंकर के जवाब को स्वागत योग्य बताया और कहा कि देश हित से जुड़ी बातों में ऐसी राजनीतिक बयानबाजी सहन नहीं की जानी चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-चीन और भारत-पाकिस्तान संबंधों में जटिलता और चुनौतियां जरूर हैं, मगर वर्तमान सरकार ने कई अवसरों पर पारदर्शिता और कूटनीतिक समझौते कर कदम बढ़ाए हैं। उन्होंने कहा कि सहयोग या टकराव के मुद्दे पर सटीक सूचनाओं के आधार पर चर्चा होनी चाहिए, न कि केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप पर।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने भी राहुल गांधी के बयान का समर्थन किया है, परंतु विपक्ष की इस रणनीति पर देशव्यापी चर्चा जारी है। यह विवाद भविष्य में भारत के विदेश संबंधों और राजनीतिक परिदृश्य को प्रभावित कर सकता है।



